राज्यपाल ने किया क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा का दौरा
हिमाचल आजकल
शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने वैज्ञानिकों को सलाह दी कि वे संस्थानों से बाहर निकलकर किसानों और बागवानों के बीच जाएं और उन्हें प्राकृतिक कृषि की जानकारी दें। इससे वे इस कृषि पद्घति को पूर्ण रूप से जरूर अपनाएंगे।
राज्यपाल ने बुधवार को शिमला के निकट क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा का दौरा किया। केंद्र का यह उनका पहला दौरा था। उन्होंने आदर्श मॉडल के रूप मेें विकसित किए गए इस केंद्र में प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उद्यान का अवलोकन भी किया। वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस कृषि पद्घति के परिणामों को देखकर वह काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बागवानी विश्वविद्यालय और सुभाष पालेकर प्राकृतिक कृषि परियोजना से जुड़े अधिकारियों को उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी।

बागवानी विश्वविद्यालय द्वारा क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान व प्रशिक्षण केंद्र में प्राकृतिक खेती-सुरक्षित विकल्प विषय पर किसानों और वैज्ञानिक की परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक कृषि कर रहे किसान आज न केवल अपनी आय में वृद्घि कर रहे हैं बल्कि प्रदेश सकल घरेलु उत्पाद भी बढ़ा रहा है। आज प्रदेश की करीब 5000 करोड़ रुपए की आर्थिकी सेब से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य को देश का विकसित राज्य बनाने के लिए यदि कोई कार्य कर रहा है तो वह हमारे किसान व बागवान हैं। पर्यटन गतिविधियों को छोडक़र इस कारण आज हिमाचल की विशेष पहचान भी बनी है। किन्नौर का सेब आज विदेशों में ऊंचे दामों पर बिक रहा है, जिससे हिमाचल की प्रतिष्ठा बढ़ी है। इस अवसर पर, राज्यपाल तथा लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला ने केंद्र के परिसर में पौधारोपण भी किया।
इससे पहले वैज्ञानिक डा$ ऊषा शर्मा ने सेब में प्राकृतिक खेती पर अपनी प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर, सुभाष पालेकर प्रातिक कृषि के परियोजना निदेशक नरेश ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि इस परियोजना के अन्तर्गत हर पंचायत में प्राकृतिक कृषि के मॉडल फार्म विकसित किए जाएंगे और 100 एेसे गांवों चयनित किए जाएंगे जहां हर किसान व बागवान प्राकृतिक कृषि को अपनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा दे रही है और इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।


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