Monday, August 3, 2026

जयराम ठाकुर ने नहीं की राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्थापितों को मुआवजा देने वकालत : विक्रमादित्य सिंह


68 राष्ट्रीय राजमार्गों के भूमि अधिग्रहण के मामलों को केंद्र से नहीं उठाया गया
हिमाचल आजकल
शिमला। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग का कभी भी निरीक्षण नहीं किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने न ही इनके शीघ्र निर्माण और विस्थापितों को मुआवजा देने की मांग की गम्भीरता से वकालत की। अब वह केवल सुर्खिया बटोरने के लिए कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का निरीक्षण कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 67 हजार करोड़ रुपए लागत के 68 राष्ट्रीय राजमार्गों की घोषणा की थी। पिछले पांच वर्षों के दौरान जयराम ठाकुर ने मुआवजा और भूमि अधिग्रहण के मामलों को अपने केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा भूमि का अधिग्रहण किए गए विस्थापितों की मांग को भी अनसुना कर दिया। अपने कार्यकाल के दौरान जय राम ठाकुर ने कभी भी राष्ट्रीय राजमार्ग स्थलों का दौरा करने की जहमत नहीं उठाई। भाजपा के कार्यकाल के दौरान इन परियोजनाआें का कार्य धीमी गति से हुए।
उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए भाजपा सरकार फोरलेन और राष्ट्रीय राजमार्गों के अधिग्रहण के लिए फैक्टर फर्मूला लागू करने के लिए पूरी तरह से विफल रही। वर्ष 2017 के विधान सभा के चुनावों के दौरान भाजपा ने अपने ²ष्टिपत्र में फर्मूला- 2 के तहत चार गुना मुआवजा देने का वायदा किया था, लेकिन भाजपा सरकार विस्थापितों को पुनर्वास संबंधी कोई भी लाभ नहीं दे पाई। उस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने मंडी के लोगों को आश्वासन दिया कि उन्हें चार गुना मुआवजा प्रदान किया जाएगा, लेकिन उनके सभी वायदे कोरी कल्पना साबित हुए।
विक्रमादित्य सिंह और सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि वहीं दूसरी आेर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह सुनिश्चित किया कि विस्थापितों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने 15 दिनों के भीतर समीक्षा कर प्रभावितों को करीब 1200 करोड़ रुपये मुआवजा वितरित करना सुनिश्चित किया। उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने किरतपुर मनाली फोरलेन परियोजना के लिए सैद्घांतिक रूप से सहमति दी थी और वित्तपोषण के अतिरिक्त फिजिबिलिटी स्टडी भी करवाई थी।

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