Sunday, August 2, 2026

पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लेक टूरिज्म को बढ़ावा देगा हिमाचल

उभरते पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित होंगे कृत्रिम जलाशय : मुख्यमंत्री
हिमाचल आजकल
शिमला । पर्यटन क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नए बदलाव महसूस किए जा रहे हैं। आज देश-विदेश से आने वाले पर्यटक प्राकृतिक नजदीक घुमना पसंद कर रहे हैं। इसी के लिए प्रदेश सरकार ने हिमाचल में स्थित झीलों, जलाशयों सहित अपने अन्य प्राकृतिक संसाधन व गंतव्य स्थल पर्यटकों के लिए और आकर्षक बनाने की पहल की है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गतिशील नेतृत्व में राज्य सरकार झीलों व जलाशयों के आस-पास लेक टूरिज्म विकसित करने की कार्य योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नैसर्गिक सौन्दर्य से परिपूर्ण झीलों से पर्यटकों को आकर्षित करेगी। इसके तहत जिला कांगड़ा के पौंग बांध, कोल डैम जलाशय, तत्तापानी के गर्म पानी के चश्मे, जिला बिलासपुर में भाखड़ा जलाशय, कुल्लू-मनाली के समीप लारजी जलाशय और चंबा में चमेरा बांध जलाशयों में जल आधारित पर्यटन गतिविधियों जैसे हाउस बोट, क्रूज और यच के संचालन को बढ़ावा प्रदान किया जाएगा।


राज्य सरकार कृत्रिम जलाशयों को अभिनव पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। प्रदेश में पर्यटकों की यात्रा को अविस्मरणीय बनाने के लिए उन्हें जल क्रीड़ा गतिविधियां, मछली पकडऩे, पक्षी देखने व पर्यावरण-पर्यटन को साहसिक पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा कला एवं शिल्प केंद्र, शपिंग आर्केड और फूड-स्ट्रीट की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, जो पर्यटकों को एक अच्छा अनुभव प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पर्यटकों को विभिन्न प्रकार के याद्गार अनुभव प्रदान करने के अलावा उनकी यात्रा अवधि को और अधिक बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन त्रिम जलाशयों के आस-पास पर्यटन बढऩे से स्थानीय लोगों को होम स्टे, रेस्तरां, रिजर्ट्स और होटल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जिससे उनकी आर्थिकी भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इन साहसिक गतिविधियों के संचालन के लिए नियम भी तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला प्रशासन को एक से दो किलोमीटर तक फैली त्रिम झील बनाने के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नगरोटा में एक वेलनेस सेंटर, आकर्षक झरनों के साथ एक त्रिम झील की स्थापना के लिए 5$ 75 हेक्टेयर भूमि की पहचान भी की गई है।

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