Wednesday, February 25, 2026

पंचायतों का हाल, दो साल में मिले 575 करोड़, खर्च हुए सिर्फ 30 करोड़

हिमाचल आजकल

शिमला, हिमाचल की पंचायती राज संस्थाएं धन राशि को खर्च करने नहीं कर पा रही है। पंचायतों में विकास कार्य फाइलों में दफन हो कर रहे गए है। पिछले दो सालों में 15वें वित्त आयोग से करीब 575 करोड़ रूपए की राशि  पंचायती राज संस्थाओं को जारी की गई है। पंचायतें, पंचायत समितियां और जिला परिषदें इस राशि को खर्च करने में नाकाम साबित  हो रही है। सूबे  की पंचायतों में विकास कार्य ठप्प पड़े  है। अहम बात यह है कि करोड़ रूपए की राशि आवंटित होने के बाद भी पंचायतें  विकास  कार्य नहीं कर पा रही है।  वहीं प्रदेश सरकार बार बार पंचायतों को पत्र जारी करके 15वें वित्त आयोग की राशि को  खर्च करने के निर्देश  दे रही है। पिछले दो सालों में पंचायती राज संस्थाओं को  15वें वित्त आयोग से करीब 575 करोड़ रूपए की राशि जारी की गई  है। इस में से करीब 30 करोड़ रूपए की राशि की खर्च हो पाई  है। बाकी  की राशि पंचायती राज संस्थाओं के खातों में लंबित पड़ है।  जबकि इस में से करीब 60 फीसदी राशि खर्च करना जरूरी है। ऐसा न होने की स्थिति में 15वें वित्त आयोग  से पंचायतों को अगली किस्त  तब तक नहीं मिलेंगे जब पंचायतें पिछली राशि को खर्च नहीं करती है। 15वें वित्त आयोग  की राशि खर्च न होने से पंचायतों में  कई महत्वपूर्ण कार्य लटक गए है।  प्रदेश में पंचायतों की संख्या 3615 है। 15वें वित्त आयोग  से पैसा सीधा पंचायतों के खाते में जाता है।

उधर, प्रदेश पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा का कहना है कि पंचायतों में 15वें वित्त आयोग राशि खर्च नहीं हो पा रही है। इस बार-बार  कई बार पंचायती राज संस्था को पत्र लिखे जा रहे है। उनका कहना है कि 15वें वित्त आयोग  की ओर अभी तक आवंटित की गई राशि  में से 60 फीसदी राशि को खर्च करना जरूरी है।  उसके बाद ही 15वें वित्त आयोग  से पंचायतों को अगली किस्त जारी होगी। करोड़ राशि खर्च न होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे है।

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