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शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि हिन्दी साहित्य की जिस कृति की डा. रामचन्द तिवारी ने आधारशिला रखी है वह विचार और चिंतन भावी पीढ़ी के लिए पथ-प्रवर्तक का कार्य करेगा। उन्होंने जहां हिन्दी-गद्य के स्वरूप-विकास की बात है, वहीं क्रमवार इसके विकास को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी-गद्य अपने विकास के पहले चरण से ही एक मध्यमार्गीय किन्तु उदार दृष्टि अपनाकर आगे बढ़ा है। राज्यपाल ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के दीन दयाल उपाध्याय, गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी व आधुनिक भारतीय भाषा और पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने डा रामचन्द्र तिवारी जी की दो पुस्तकों हिन्दी का गद्य-साहित्य के 15वें संस्करण तथा‘योग के विविध आयाम के तृतीय संस्करण का लोकार्पण किया।
उन्होंने कहा कि डा. तिवारी ने हिन्दी-गद्य की विधाओं के विकास पर गहन अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी-गद्य-साहित्य को आज एेसे प्रान्तों की जन-चेतना का भी प्रतिनिधित्व करना है, जो विकास एवं प्रगति की ²ष्टि से हिन्दी-प्रदेश से सैकड़ों वर्ष आगे हैं। उन्होंने कहा कि लेखक ने पत्र-पत्रिकाओं के संक्षिप्त इतिहास का जो अवलोकन किया है वह हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणादायक है साथ ही, भावी पीढ़ी के पत्रकारों के लिए मार्गदर्शन और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान का भण्डार है।
राज्यपाल ने किया डा. रामचन्द्र तिवारी की पुस्तकों का लोकार्पण
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