Thursday, February 26, 2026

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास करने की जरूरत : राज्यपाल

हिमाचल आजकल

शिमला।राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता के साथ-साथ प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने और शोध एवं नवाचार के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने यह बात आज राजभवन में राज्य के छह सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। विद्यार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा विषय-वस्तु में मजबूत होने के अलावा वैश्विक परिदृश्य की उभरती मांगों के लिए भी प्रासंगिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम निरंतर अपडेट किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति के बारे में जानकारी मिलती रहे। उन्होंने कहा कि छात्रों के समग्र विकास के लिए शैक्षिक ज्ञान, शारीरिक शिक्षा के साथ-साथ खेल-स्पर्धाओं और अन्य गतिविधियों के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए कृतसंकल्प है और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शैक्षणिक संस्थानों को पूर्व निर्धारित मापदंडों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से ‘शैक्षणिक संस्थानों के समूह’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में 9.56 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में कमी आई है और इसे सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अधिकांश जनसंख्या कृषि और बागवानी पर निर्भर है और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई तकनीक और नवाचार अपनाने से आर्थिकी को और मजबूत किया जा सकता है। राज्य के कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों की इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

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