Friday, February 27, 2026

हिमाचल में रॉयल सेब की खेती से सेब के कारोबार को पहचान मिली

प्रदेश में 90 फीसदी हिस्से में रॉयल किस्म के सेब का दबदबा
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल प्रदेश की जलवायु पारिस्थितिकीय तंत्र सेब की खेती के लिए उपयुक्त है, और इसी कारण सेब उत्पादन और बागवानी पिछले 70 से 80 वर्षों में यहां समुचित रूप से फली-फूली है और वर्तमान समय में यह प्रदेश की आर्थिकी में एक अहम और बड़ा स्थान रखती है, जिसके तहत न केवल सेब उत्पादक ही एक अच्छा रोजगार कमा रहे है बल्कि इस कार्य से जुड़े मजदूर, व्यापारी व वाहन मालिक भी अच्छी खासी कमाई करते है। संक्षेप में कहे तो सेब बागवानी लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करवाती है और साथ ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी अपना अहम योगदान निभाती है। यह राज्य की जीडीपी में सालाना 5 हजार करोड़ रुपए का योगदान देती है। इसके अतिरिक्त हिमाचल के 5 लाख से अधिक लोग सीधे तौर पर इससे जुड़े हुए है।
परम्परागत तरीके से हिमाचल में रॉयल सेब की खेती से सेब के कारोबार में पहचान मिली। सबसे पहले एक अमेरिकी नागरिक सैमुअल इवान स्टोक्स ने कोटगढ़ क्षेत्र में रॉयल सेब को उगाया था। उसके बाद जैसे-जैसे सेब की खेती का क्षेत्र विस्तृत होता गया वैसे-वैसे रॉयल सेब को जिला शिमला व किन्नौर के अलावा अन्य स्थानों पर भी उगाया जाने लगा और वर्तमान में सेब बागवानी के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में रॉयल किस्म के सेब का ही दबदबा है।


उच्च घनत्व की खेती
उच्च घनत्व की खेती से आशय यह है कि एक भूमि के टुकड़े पर जहां रॉयल सेब के केवल 15 से 20 पेड़ लगाए जा सकते है, वहीं उच्च घनत्व के आधार पर उसी भूमि के टुकड़े पर 60 से 70 अथवा 100 पेड़ तक लगाए जा सकते है। इस प्रकार की खेती को वर्तमान समय की मांग माना जा रहा है। प्रदेश में अधिकतर स्पर किस्म जैसे रेड चीफ, स्कारलेट-1, स्कारलेट-2, एड्मस-1 जैसी अन्य किस्मों को उगाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गाला प्रजाति के सेब जैसे रेडलम गाला, गेल गाला इत्यादि अन्य किस्मों को उगाया जा रहा जुब्बल क्षेत्र के बागवान लोकिन्दर चौहान का कहना है कि हमें अब धीरे-धीरे उच्च घनत्व की खेती की आेर बढऩा होगा क्योंकि बदलती परिस्थितियों में अब परंपरागत खेती संभव नहीं हो सकेगी। उन्होंने बताया कि 2020 में उन्होंने एक जमीन के भाग में उच्च घनत्व पर गाला के पौधे लगाए थे, जिसमें पिछले वर्ष यानि 2024 में उन्होंने फसल लेना शुरू कर दिया है। कोटखाई क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान प्रेम चौहान ने भी उच्च घनत्व की खेती का समर्थन किया है और बताया कि अगर बागवानी में नई तकनीकों का प्रयोग किया जाए तो रॉयल सेब को भी उच्च घनत्व पर उगाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उचित जानकारी और सही प्रशिक्षण की जरूरत है। रोहडू क्षेत्र के एक और बागवान अमन शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में पुराने सेब के पौधों को उखाड़ कर उच्च घनत्व वाले 1000 पौधे लगाए थे।

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