Sunday, January 11, 2026

कॉलेजों व स्कलों में अगले सत्र से बागवानी को व्यावसायिक विषय के रूप में किया जाएगा शुरू: रोहित ठाकुर

शिक्षा मंत्री ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बागवानी पाठ्यक्रम तैयार करने के दिए निर्देश
हिमाचल आजकल
शिमला। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि बागवानी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो सेब, आम, नींबू प्रजाति के फलों और अन्य फलोत्पादन के माध्यम से प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहा है। 9वीं से 12वीं कक्षा और आगे स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर बागवानी विषय को शामिल करने से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और उद्यमशीलता की भावना विकसित होगी। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ फल उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और संबद्घ उद्योगों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। शिक्षा मंत्री ने आज कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) और हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में अगले शैक्षणिक सत्र से बागवानी को व्यावसायिक विषय के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया गया।

रोहित ठाकुर ने शिक्षा विभाग को मंत्रालय द्वारा मांगी गई सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए ताकि यह पाठ्यक्रम अगले शैक्षणिक सत्र से लागू हो सके। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर ही बागवानी की पढ़ाई शुरू करने से बच्चों में खेती, पर्यावरण संतुलन और राज्य की  समृद्ध कृषि परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित होगी। हिमाचल की करीब 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, ऐसे  में बच्चों को बागवानी को सिर्फ आजीविका नहीं बल्कि एक आधुनिक, लाभकारी और सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश हमेशा आग्रणी रहा है, जिसका प्रमाण असर, परख और एनएएस सर्वेक्षणों के सकारात्मक परिणामों में दिखे हैं। अब प्रदेश को कौशल आधारित शिक्षा की दिशा में भी मजबूती से आगे बढऩे के लिए भी समान प्रतिबद्घता दिखानी होगी। बागवानी का समावेश कक्षा की पढ़ाई और व्यवहारिक कार्यानुभव के बीच की दूरी कम कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करके अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा।
उन्होंने कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय से आग्रह किया कि पाठ्यक्रम हिमाचल की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जाए। उन्होंने शिक्षकों को त्रिम मेधा (एआई) का प्रशिक्षण देने पर भी बल दिया, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को शिक्षा में प्रभावी ढंग से शामिल कर सकें।

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