हिमाचल प्रदेश के 29.5 प्रतिशत वन एवं ट्री कवर को मान्यता देने का आग्रह किया
हिमाचल आजकल
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाक़ात की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य के वास्तविक ट्री कवर 29.5 प्रतिशत और आधिकारिक रूप से दर्ज 27.99 प्रतिशत के बीच पाई गई विसंगति के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि यह विसंगति राज्य के वन एवं ट्री कवर की समेकित गणना में वनों के बाहर के पेड़ों (ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट) को शामिल न किए जाने के कारण उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार निजी भूमि पर विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत वृक्षों के कटान पर कड़े नियम लागू किए हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार से इस संबंध में राज्य को प्रोत्साहन नहीं मिलता है।
मुख्यमंत्री ने इस 1.5 प्रतिशत घटक को हरित आवरण में शामिल किए जाने पर बल देते हुए कहा कि इससे राज्य के वास्तविक पारिस्थितिक एवं वानिकी योगदान को उचित मान्यता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट, हरित आवरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को क्षरण से बचाने में सहायक हैं।
उन्होंने आग्रह किया कि वित्त आयोग अथवा केंद्र सरकार द्वारा की जाने वाली अन्य सभी आवंटन गणनाओं में हिमाचल प्रदेश के लिए 29.5 प्रतिशत वन एवं ट्री कवर को मान्यता दी जाए। उन्होंने अनुरोध किया कि 1.5 प्रतिशत ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट वनों को पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं संवर्धन और पर्यावरणीय शासन में एक वैध एवं नीतिगत रूप से महत्त्वपूर्ण योगदान के रूप में स्वीकार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट घटक का कम आकलन करने से राष्ट्रीय पारिस्थितिकी सेवाओं में हिमाचल प्रदेश के वास्तविक योगदान को कमतर आंका जाता है। इससे उन राज्यों के साथ पक्षपात की स्थिति उत्पन्न होती है जो वनों के संरक्षण को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने गैर-वन और निजी भूमि पर वन एवं हरित आवरण बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की भी जानकारी दी।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य को हर संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह भी उपस्थित थे।


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