मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना दुर्भावनापूर्ण: सुक्खू
हिमाचल आजकल
शिमला। शहीद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ आज शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कांग्रेस के नेताओं ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजग़ार गारंटी अधिनियम (मनरेग)का नाम बदलने और योजना को कमजोर किए जाने के विरोध में दो घंटे का उपवास रखा।
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार नेए न केवल मनरेगा का नाम बदला है बल्कि योजना के मूल स्वरूप को भी कमज़ोर किया है। पहले यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को रोजग़ार के अवसर प्रदान करती थी, लेकिन अब रोजग़ार के अवसरों में कटौती की जा रही है।
सुक्खू ने कहा कि पहले गांव के प्रधानों को मनरेगा के तहत सडक़ निर्माण जैसे कार्य करवाने की शक्तियां प्राप्त थीं, जिससे लोगों को अपने घर.द्वार के निकट रोजग़ार मिलता था। कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने लोगों को रोजग़ार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा पिछले 20 वर्षों से मनरेगा अधिनियम में रोजग़ार की गारंटी थी और काम उपलब्ध न होनेे की स्थिति में बेरोजग़ारी भत्ता देने का प्रावधान भी था।

सेब पर आयात शुल्क में कमी से जुड़े सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ आयोजित पिछली बैठक में उनसे न्यूजीलैंड से आयातित सेब पर शुल्क कम करने का मुद्दा उठाया था। आयात शुल्क में किसी भी प्रकार की कमी हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से अधिकारियों और बाग़वानों की एक टीम भेजने को कहा है।
इस अवसर पर कांग्रेस हिमाचल प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, स्वास्थ्य मंत्री डा. कर्नल धनी राम शांडिल, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सह प्रभारी विदित चौधरी सहित कई लोगों मौजूद थे।


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