जुब्बल के मंढोल में ट्रायल के तौर पर स्थापित की पहली स्वदेशी एंटी हेल गन
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल में सेब के फसल को ओलों के कहर से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एंटी हेल गन का ट्रायल किया जा रहा है। जुब्बल के मंढोल में में स्वदेशी एंटी हेल गन स्थापित की गई है। यह एंटी हेल गन ट्रायल के तौर पर स्थापित की गई है। अगले कुछ दिनों में इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा। सूबे में सेब के फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए है। इसके लिए 10 करोड़ रूपए का एक प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश के कई अन्य स्थानों पर पर स्वदेशी तकनीक से बनी एंटी हेल गन स्थापित की जाएगी। स्वदेशी एंटी हेल गन आईआईटी मुंबई और बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के पर्यावरण विभाग के वैज्ञाानिकों ने तैयार की है। इस स्वदेशी एंटी हेल गन की कीमत 12 से 15 लाख रूपए बताई जा रही है। इससे पहले इस एंटी हेल गन का ट्रायल सोलन के कंडाघाट में किया जा रहा था। लेकिन अब इस स्वदेशी एंटी हेल गन ट्रायल जिला शिमला के जुब्बल के मंढोल में किया जा रहा है। एंटी हेल गन को मंढोल के पहाड़ी पर स्थापित किया जा चुका है। इस एंटी हेल गन के हवा में एक किलोमिटर के दायरे में ओलावृष्टि को रोकने के दावे किए जा रहे है। काबिलेगौर है कि भाजपा सरकार में वर्ष 2011 में विदेशी एंटी हेल गन शिमला के कोटखाई व जुब्बल में स्थापित की गई थी। बाद में कुछ जगह इस विदेशी एंटी हेल गन का प्रयोग बंद कर दिया गया था।
सरकार अन्य क्षेत्रों में भी करें एंटी हेल गन का ट्रायल: हरीश चौहान
हिमाचल प्रदेश फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि स्वदेशी एंटी हेल गन का पहली बार ट्रायल किया जा रहा है। यह एंटी हेल गन आलावृष्टि को रोकने में कितनी कारगार साबित होगी इसको अगले कुछ दिनों में पता चल जाएगा। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार कई अन्य क्षेत्रों में भी स्वदेशी एंटी हेल गन का ट्रायल शुरू करें ताकि इसके नतीजों को सही पता चल सके। अगर स्वदेशी एंटी हेल गन का ट्रायल सफल रहा तो इससे सेब की फसल को आलों से बचाने में काफी मदद मिलेगी। इस बारे प्रदेश सरकार के सामने भी मामला उठाया जाएगा।


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