20 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में दिखेगा आंदोलन का असर
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल में किसान व बागवानों का बढ़ते विरोध से सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। सेब की पैकिंग सामग्री मंहगी होने के बाद किसान व बागवान सरकार के खिलाफ लामबंद्व होने लगे है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किसाना बागवानों का आंदोलन भाजपा सरकार पर भारी न पड़ जाए। हालांकि अब सरकार व प्रशानिक अमला डेमेज कंट्रोल में जुट गया है। किसानों व बागवानों के आंदोलन का असर प्रदेश के करीब 20 चुनाव क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
कार्टन व अन्य सेब की पैकिंग सामग्री के दामों में इस बार काफी ज्यादा बढ़ौतरी हुई है। कार्टन पर केंद्र सरकार ने 18 फीसदी जीएसटी लगाया है। हालंाकि राज्य सरकार ने बागवानों के विरोध के बद जीएसटी में 6 फीसदी की कटौती की है। लेकिन बागवान अब कार्टन पर जीएसटी का खत्म कने की मांग पर अड़े है। बीते दिनों शिमला में प्रदेशभर के किसानोंव बागवानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। हजारों की संख्या किसान व बागवान विरोध प्रदर्शन करने शिमला में सचिवालय के बाहर पहुंचे। किसाना व बागवानों का यह आंदोलन विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हो रहा है। विधानसभा चुनाव में किसानों व बागवानों की नाराजगी का असर सूबे के 20 चुनाव क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। शिमला व कुल्लू जिला में बागवानों के आंदोलन का असर ज्यादा रहेगा। जबकि मंडी,सिरमौर व चंबा जिलों के किसान बागवानों अपने मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे है। इन जिलों में भाजपा को नुकसान होने के असार नजर आने लगे है। अब वहीं दूसरी ओर सरकार भी हरकत में आ गई है। सरकार की ओर से डेमेज कंट्रोल भी शुरू हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी अब नए सिरे से बातचीत करने की तैयारी कर रहे है। अगले कुछ दिनों में सरकार बागवानों के प्रतिनिधियों को एक बार फिर से बातचीत के लिए बुलाने की तैयारी कर ही है। बातचीत के एजेंडा का खाका तैयार किया जा रहा है। बहरहाल किसान व बागवानों के तेवर तल्ख है। किसाना व बागवानों को मांगों को नजरअंदाज करना सरकार को कहीं भारी न पड़ जाएं।


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