फल मंडियों में प्रति किलो के हिसाब से सेब बेचने के पक्ष में बागवान
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल में सेब की पैकिंग का मामला फिर गरमाने लगा है। इस कड़ी में प्रदेश के किसान व बागवान संगठन एकजुट होने लगे है। बागवान अब फल मंडियों में प्रति किलो के हिसाब से सेब बेचने के मांग कर रहे है। इसके अलावा बागवान सेब की पैकिंग के यूनिवर्सल कार्टन शुरू करने के पक्ष में नजर आ रहे है। सेब मंडियों में बागवानों का हो रहा शोषण को लेकर शिमला में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेशभर के करीब 16 बागवानी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रदेश के बागवान व किसान एक बार फिर लामबंद्व होने लगे है। फल मंडियों में बागवानों से हो रही लूट को रोकने के लिए बागवानी संगठनों ने अब आवाज उठानी शुरू कर दी है। शिमला आयोजित बैठक में बागवानों का मानना था कि फल मंंडियां में अन्य फलों की तरह सेब भी प्रति किलो के हिसाब से बिकना चाहिए। इसके लिए बागवान एपीएमसी एक्ट को सख्ती से लागू करें। बागवानों की राय है कि सेब की पेकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन शुरू किया जाए। ताकि मंडियों में तय मापदंडों से ज्यादा सेब न जाए। ज्यादा वजनदार पेटियों से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बागवानी जल्द इस पूरे मामले को सरकार के सामने उठाने की रणनीत बना रही है।
हिमाचल प्रदेश किसान संयुक्त किसान मंच संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि बागवानों की समस्या का निपटारा करने के लिए जल्द मुख्यमंत्री स्तर पर एक बैठक बुलाया जाए। इस बैठक में सेब बाहुल क्षेत्र के मंत्री व विधायकों को भी आमंत्रित किया जाए। ताकि सेब बागवानों की समस्या को लेकर गहन मंथन हो सके। उनका कहना है कि सरकार बागवानों को उपदान पर फंफूदनाशक व कीटनाशक दवाइयां उपलब्ध करें। इसके अलावा एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब का भुगतान बागवानों को जल्द किया जाए। उन्होंने फल मंडियों में सेब प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाए। तभी बागवानों को सेब की उचित दाम मिल सकेंगे।
हिमाचल में फिर गरमाने लगा सेब की पेकिंग का मामला
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