हिमाचल आजकल
शिमला, इस सुन्दर कैम्पस में आज आप सभी के बीच आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है। अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध शिमला में अध्ययन करना आप सबके लिए एक सुखद अनुभव रहा होगा। आज डिग्री प्राप्त कर रहे सभी विद्यार्थियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं।
यह दीक्षांत समारोह आपके माता-पिता, प्रियजनों और सभी शिक्षकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। आपकी अब तक की जीवन यात्रा में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। मैं उन सभी के योगदान की सराहना करते हुए उनको विशेष बधाई देती हूं।
वर्ष 1970 में स्थापित हुए इस विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाई है। इस संस्थान के पूर्व छात्रों ने कला, चिकित्सा, न्यायपालिका, खेल-कूद, समाज सेवा, राजनीति और प्रशासन सहित अन्य क्षेत्रों में अपनी विशेष छाप छोड़ी है। मुझे पूरा विश्वास है कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और शिक्षकों के मार्गदर्शन में आप सभी सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे तथा हिमाचल प्रदेश और पूरे भारत का मस्तक ऊंचा करेंगे।

हिमाचल विश्वविद्यालय में पढ़ रहे लगभग एक लाख विद्यार्थियों में से 70 प्रतिशत लड़कियां हैं। आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले लगभग 100 विद्यार्थियों में से 70 लड़कियां हैं। और मुझसे पदक प्राप्त करने वाले दस विद्यार्थियों में से भी सात लड़कियां हैं। शिक्षा में हमारी बेटियों की यह प्रतिभा देख कर मुझे बहुत गर्व होता है।
एक अच्छा शैक्षिक संस्थान वह है जहां प्रत्येक विद्यार्थी का स्वागत किया जाता है और उसके सम्पूर्ण विकास के लिए एक सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान किया जाता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा और हॉस्टल की सुविधाएं प्रदान की जा रही है। दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में higher enrolment के लिए की गयी यह एक सराहनीय पहल है। इसके साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि इस विश्वविद्यालय के सभी कैंपस परिसर दिव्यांग-जनों की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सक्षम हो।


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