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शिमला । सूबे के बागवानों को लिए राहत भरी खबर। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीद गए सेब का बागवान को नकद भुगतान किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने एचपीएमसी को 6 करोड़ रूपए की राशि जारी कर दी है। पिछले लंबे समस से बागवान एमआईएस के सेब की नकद भुगतान की मांग कर रहे थे।प्रदेश सरकार ने एचपीमएसी को दो सालों की मंडी मध्यस्थता योजना राशि का नुकद भुगतान करने के निर्देश दिए है। बागवानों को वर्ष 2019 -2020 में खरीद गए सेब का भुगतान किया जा रहा है। बाकायदा इसके लिए सरकार ने एचपीएमसी को 6 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान कर दिया है। वर्ष 2019 में मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीद गए सेब का बागवानों को तीन करोड रूपए का भुगतान किया जाना है। जबकि इतनी ही राशि का भुगतान वर्ष 2020 का भी करना है। वहीें सरकार ने बागवानों को नकद राशि जारी करके राहत प्रदान की है। सूबे के बागवान पहले ही इस राशि की मांग करते आ रहे है। नकद भुगतान से मध्यम और छोटे बागवानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकारी उपक्रम एचपीएमसी ने इस बार मंडी मध्यस्थता योजना के तहत बागवानों से करीब 38 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद कर है। इस सेब का बागवानों को करीब 36 करोड़ रूपए का भुगतान किया जाना है। फिलहाल सरकार ने एचपीएमसी को बागवानों से खरीदे गए पिछले दो साल के सेब का नकद भुगतान करने के निर्देश जारी दिए है।
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बागवानों को नकद भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई: राजेश्वर गोयल
उधर ,एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल का कहना है कि बागवानों को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत नकद राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले वर्ष 2019 में खरीदे गए सेब का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2020 में खरीद गए सेब का भुगतान किया जाएगा। उनका कहना है कि इस वर्ष मंडी मध्यस्थता योजना खरीदे गए सेब की राशि के भुगतान के लिए बागवानी विभाग को प्रस्ताव भेज दिया गया है। सरकार से राशि जारी होने के बाद बागवानों को भगतान की प्रक्रिया शुरू कर जाएगी। सरकार से अभीएचपीएमसी को 6 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त हुई है।


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