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शिमला। प्रदेश सरकार ने सेब उत्पादकों को सुविधा प्रदान करने और उनकी उपज के लिए एक बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए कर्ई अहम कदम उठाए हैं। भारी बारिश से आई आपदा के बाद राज्य सरकार सेब उत्पादक क्षेत्रों में सडक़ों की बहाली पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि बागवानों को सुचारू परिवहन सुविधा मिले सके। मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह बात वीरवार देर आढ़ती संघ के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेब सीजन के दौरान बागवानों के सामने आने वाली किसी भी परिवहन बाधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सडक़ एवं अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के तहत इसके लिए 70 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की परियोजना का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सडक़ों की शीघ्र बहाली के लिए युद्घस्तर पर मरम्मत कार्य किया जा रहा है। उ परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए, राज्य सरकार नेरी पुल के माध्यम से छैला से यशवंत नगर सडक़ को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भंडारण सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार राज्य भर में प्रमुख स्थानों पर नियंत्रित वातावरण (सीए) स्टोर स्थापित करने की योजना बना रही है। ये सीए स्टोर भावानगर (किन्नौर), संदासू (चिडग़ांव), अणु (जुब्बल), चौपाल (शिमला), जाबली (सोलन), सुंदरनगर (मंडी), दत्तनगर (रामपुर बुशहर) और खड़ापत्थर (शिमला) में स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, दिल्ली में कुंडली सीमा पर राज्य सरकार की भूमि पर एक और सीए स्टोर बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एक डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार कर रही है ताकि निम्न गुणवत्ता के सेब से भी बागवान लाभ अर्जित कर सकें।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य सरकार सेब उत्पादकों को शोषित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ अपने रुख पर कायम है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आढ़ती संघ ने बागवानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुरानी व्यवस्था के आधार पर सेब तोलने या खरीदने पर सहमति जताई।
70 करोड़ से होगा छैला-यशवंत नगर वाया नेरी पुल सडक़ का सुदृढ़ीकरणः: सुक्खू
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