बागवानों को इस बार भी भारी आर्थिक नुकसान खतरा मंडराया
हिमाचल आजकल
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद प्रदेश की फल मंडियों के आढ़तियों ने शुक्रवार को सेब बेचना शुरू किया है। शिमला की भट्ठाफर मंडी और पराला मंडी में आढ़तियों ने पेटी के हिसाब से सेब को बेचा। किलो के हिसाब से आढ़तियों ने सेब बेचने से पहले ही मना कर दिया था। अब ऐसे में बागवानों के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई।
वीरवार को आढ़तियों के हड़ताल के चलते मंडियों में सेब का कारोबार
प्रभिावित हुआ था। लेकिन वीरवार देर शाम आढ़तियों ने मुख्यमंत्री से
मुलाकता की। इसके बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म की। अब शुक्रवार को प्रदेश के अधितकर मंडियों में किलो के हिसाब के बजाए पेटी के हिसाब से सेब की बोली लगाई गई। ऐसे में प्रदेश की मंडियों में बागवानों के सामने नई दुविधा खड़ी हो गई। शुक्रवार को भट्ठाकुफर फल मंडी में पेटी के हिसाब से सेब को बेचा गया। ऐसे पराला मंडी में भी किया गया। आढ़तियों के इस फैसले से बागवानों पर आर्थिक नुकसान होने का खतरा मंडराने लगा है। हालंाकि शुक्रवार को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने साफ किया कि फल मंडियों में किलो के हिसाब से ही सेब को बेचा जएगा। लेकिन आढ़तियों ने बागवानी मंत्री के अदेशों को मानने से साफ मना कर दिया है। लिहाजा आढ़तियों के अडिय़ल रवैय से सरकार की दो महीने की कसरत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
उधर, इस मामले भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार में तालमेल की कमी है। सरकार इस मसले पर अभी तक अङ्क्षतम निर्णय तक नहीं पहुंच पाई है।अहम बात यह है कि सेब सीजन के शुरूआत में प्रदेश की फल मंडियों में किलोके हिसाब से सेब बेचा गया था। लेकिन मंडियों में सेब की आमद बढऩे के बादआढ़तियों ने किलो के हिसाब से सेेब बेचने में अपने हाथ खड़े कर दिए है।
जबकि सेब सीजन से पहले किलो के हिसाब से सेब बेचने को लेकर सरकार, आढ़तियों व बागवानों के बीच कई दौर की बैठक हुई थी। लेकिन अब आढ़तियों ने किलो के हिसाब से सेब बेचने का मना कर दिया है।


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