फल मंडियों में 70 से लेकर 140 रुपए तक बिक रहा सेब
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल के बागवानों को इस बार सेब के ऊंचे दाम मिल रहे है। प्रदेश सरकार ने प्रदेश की फल मंडियों में पहली बार किलो के हिसाब से सेब बेचने की प्रथा शुरू की है। इसका सीधा फायदा बागवानों को मिलने लगा है। मंडियों में सेब का दाम किलो के हिसाब से लगने के बाद बागवान अब क्वालटी सेब तैयार करने की ध्यान देने लगे है।
लंबे समय बाद प्रदेश की मंडियों में बागवानों को अपने उत्पाद का अच्छा दाम मिल रहा है। फल मंडियों में बागवानों को 70 रुपए से लेकर 140 रुपए प्रति किलो दाम मिल रहा है। इसा पहले कभी नहीं हुआ था। पिछले साल तक प्रदेश की मंडियों में पेटियों के हिसाब से सेब बेचा जाता रहा है। सेब की एक पेटी का वजन 28 से लकर 32 किलो तक होता था। जबकि बागवानों को इसका दाम काफी कम मिलता रहा है। बागवानों को भाी आर्थिक नकसान उठाना पड़ रहा था। अब प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सभी फल मंडियों में किलो के हिसाब से बेचने की परंपरा शुरू की है। बागवानों को 24 किलो की पैकिंग करना भी जरूरी किया गया है। हालांकि इसमें बागवानों को पहली साल थोड़ी दिक्कतें हो रही है। लेकिन अगले साल से सेब की यूनिवर्सल पैकिंग की भी सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। प्रदेश की पराला, सोलन, भट्ठाकुफर, परवाणु के अलावा अन्य छोटी मंडियों में भी सख्ती से किलो के हिसाब से सेब बेचने की निर्देश जारी किए है। यही नहीं एसडीएम व तहसीदार को मंडियों में चैकिंग के लिए उतारा गया है। नियमों का उल्लघंन करने वाले आढ़तियों को लाइसेंस रद्द किए जा रहे है। बहरहाल प्रदेश सरकार के इस फैसले से बागवानों को आर्थिक लाभ मिलने लगाा है।
उधर, शिमला किन्नौर मंडी समिति के सचिव देव राज कश्यप का कहना है कि सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। मंडियों में आढ़ती किलो के हिसाब से सबे बेच रहे है। उनका कहना है कि बागवान को पहली बार सेब के अचछे दाम मिल है। बागवानोंं को अधिक वजन वाली सेब की पेटियों को लानी की मनाही की गई है। बागवानों को पेटी में वजन लिख कर फल मंडी में भेजनी चाहिए।
मंडियों में किलों के हिसाब सेब बेचने से खुशहाल हो रहे बागवान
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