Sunday, August 2, 2026

हिमाचल भाजपा का शिमला में कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोल

झूठे वादों व गारंटियों से जनता को गुमराह करके सत्ता में आई कांगे्रस का असली चेहरा बेनकाब : जयराम ठाकुर
हिमाचल आजकल
शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा विधानसभा चुनाव के समय झूठे वादों और गारंटियों से जनता को गुमराह करके सत्ता में आई कांगे्रस का असली चेहरा 9 महीनों में ही बेनकाब हो गया है। इस सरकार का न तो कोई विजन है और न ही कोई प्राथमिकता। सत्ता के मजे ले रही इस सरकार को जनता की पीड़ा का भी कोई अहसास या परवाह नहीं है। यहां तक कि प्रातिक आपदा से निपटने के लिए भी सरकार में कोई तालमेल नजर नहीं आया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और कांग्रेस नेता अलग-अलग राग अलापते रहे। आपदा पीडि़तों की सही मायनों में मदद करने के बजाए कांग्रेस सरकार का फोकस इस बात पर रहा कि त्रासदी की वजह से राजनीतिक नुकसान से कैसे बचा जाए। कोई भी सरकार देश या प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए बनती है, लेकिन हिमाचल में कांग्रेस की सरकार इस पर्वतीय राज्य को पीछे धकेलने का काम कर रही है। आपदा से उबरने के लिए केंद्र से भरपूर मदद मिलने के बावजूद अहसानफरामोश सत्ता पक्ष केंद्र सरकार पर हिमाचल की अनदेखी के झूठे आरोप लगा रहा है।
सोमवार को शिमला में आक्रोश रैली में जयराम ठाकुर ने कहा कि 9 महीने पहले सत्ता में आई कांग्रेस ने एक भी फैसला जनहित में नहीं लिया। उसने कदम-कदम पर जनविरोधी फैसले लिए। भर्ती परीक्षाआें के रिजल्ट नहीं निकाले जा रहे हैं। कोरोना के समय नियुक्त किए गए लगभग 1800 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के नोटिस जारी हो चुके हैं। इसी तरह पीडब्ल्यूडी और आईपीएच समेत कई अन्य विभागों और संस्थानों से हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को घर भेज दिया गया। इसके चलते प्रदेश में अराजकता का माहौल है। उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क, टोल बैरियरों पर उठ रहे विवादों से प्रदेश के टैक्सी व ट्रक चालकों तथा औद्योगिक घरानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बिगड़ती कानून व्यवस्था मौजूदा सरकार की एक बड़ी नाकामी है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का पूरी तरह से जनाजा निकल गया है। आलम यह है कि असामाजिक तत्व बेखौफ होकर दिन-दिहाड़े आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे देवभूमि हिमाचल की छवि दागदार हो रही है। कांग्रेस सरकार के राज में प्रदेश की महिलाआें से हो रही निर्लज्जता और घिनौनी हरकतें प्रदेश को शर्मसार कर रही हैं। इसका एक जीता-जागता उदाहरण मुख्यमंत्री के गृह जिला में भी सामने आया है। कांग्रेस शासनकाल में आए दिन कानून की धज्जियां सरेआम उड़ रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के समय लोगों की मांग और जरूरत के आधार पर खोले गए 1000 से अधिक संस्थानों को इस सरकार ने राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से काम करते हुए बिना सोचे-समझे बंद कर दिया। अब उन्हीं को दोबारा खोलने की घोषणा करके यह सरकार अपनी जगहंसाई करवा रही है। हिमाचल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि लोगों और कर्मचारियों को 9 महीने में ही सरकार के खिलाफ सडक़ों पर उतरना पड़ रहा है। भाजपा की आक्रोश रैली से पहले से ही सरकार के खिलाफ आए दिन जमकर नारेबाजी हो रही है। सरकार के भेदभावपूर्ण कार्यों, मंहगाई, बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिलाआें पर अत्याचार तथा आपदा राहत में बंदरबांट के विरोध और पहली केबिनेट में एक लाख युवाआें को रोजगार देने, महिलाआें को प्रतिमाह 1500 रुपये देने, 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने तथा किसानों से गोबर खरीदने जैसे वादों और गारंटियों का स्मरण करवाने के लिए भाजपा ने आक्रोश रैली के माध्यम से सभी वर्गों की आवाज बुलंद की है। विधानसभा का घेराव करके सरकार की कारगुजारियों का पोस्टमार्टम करके उसकी रिपोर्ट जनता के समक्ष रखी गई है। सरकार को चुनाव में किए गए वादों और गारंटियों का हिसाब जनता को देना ही होगा। इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल और पार्टी के अन्य वरिष्इ नेताओं ने भी आक्रोश रैली को संबोधित किया।

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