Monday, January 12, 2026

सेब की 24 किलो की पेटी से बागवानों को मिल रहे बेहतर दाम

प्रदेश में सेब विपणन की नई प्रक्रिया से बागवान गदगद

हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब की बागवानी आर्थिकी का एक अहम हिस्सा है। बागवानी न केवल अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देती है बल्कि सेब से जुड़ा व्यवसाय काफी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाता है। इस व्यवसाय से न केवल प्रदेश के बल्कि प्रदेश के बाहर के लोग भी प्रत्यक्ष अथवा प्रोक्ष रूप से जुड़े हैं।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता संभाली और सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सत्ता सीन होते ही सरकार ने विभिन्न वर्गो के कल्याण के लिए योजनाओं  पर जोर देना शुरू किया। खासकर कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में अहम निर्णय लेते हुए सरकार ने सेब को प्रति किलो के हिसाब से खरीदने व बेचने का निर्णय लिया। हिमाचल में सेब की बागवानी को लाभकारी व मजबूत बनाने के लिए से यह निर्णय अति अहम माना जा रहा है। इस बीच बहुत समय से बागवानों की यह मांग थी कि सेब को किलो के हिसाब से बेचा जाए जोकि अब तक धड़े में बिक रहा था। कुछ बागवान सेब की पेटी में मनचाहे वजन का सेब भर रहे थे जबकि अंर्तराष्टीय मानकों के अनुरूप सेब की एक पेटी में 24 किलो से अधिक सेब नहीं भरा जा सकता लेकिन हिमाचल के सेब पर इस प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं था।


सुरेन्द्र चौहान को छोटे आकार के सेब का मिला अच्छा दाम
किसानों के जिस वर्ग के लिए इस व्यवस्था का निर्णय लिया गया है वह इस सरकार के फैसले से संतुष्ट और प्रसन्न दिखाई दे रहा है। जिला शिमला की उप तहसील जांगला के एक मध्यमवर्गीय बागवान सुरेंद्र चौहान ने बताया कि सरकार द्वारा लाई गई इस व्यवस्था से इस वर्ष उन्हें सेब के दाम अपेक्षात अच्छे मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मौसम की प्रतिकूलता के चलते उनके सेब का आकार छोटा रह गया है जिससे कि उन्हें अच्छे दाम मिलने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछली व्यवस्था के अनुसार लार्ज, मीडियम, स्मॉल और एक्स्ट्रा स्मॉल आकार का सेब पांच तहों में भरा जाता था। जिसका वजन 27 से 28 किलो के बीच होता था। साथ ही 240 नंंबर व 310 नंबर सेब 6 तहां में भरा जाता था जिसका वजन लगभग 32 से 34 किलो होता है।
जुब्बल क्षेत्र के एक और प्रगतिशील बागवान नरेश वर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा सेब को किलो के हिसाब से बेचने का निर्णय काबिले तारीफ है। सेब के रंग, आकार व गुणवत्ता के आधार पर मंडियों में उचित दाम मिले इसलिए यह जरूरी है कि सेब को प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाए ।

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