Sunday, April 12, 2026

उप चुनाव में जनता ने कांग्रेस पर जताया भरोसा , जीती 4 सीटें

विधानसभा में कांग्रेस का कुनबा बढ़ा, विधायकों की संख्या हुई 38

हिमाचल आजकल

शिमला।  हिमाचल में एक बार फिर लोगों ने कांग्रेस पर अपना भरोसा जताया है। प्रदेश में हुए  विधानसभा के 6 उप चुनाव में कांग्रेस ने 4 सीटों पर परचम लहराया है।  जबकि भाजपा की झोली में दो सीटें आई है। ऐसे में  अब कांग्र्रेस की विधानसभा में विधायकों की संख्या 38 हो गई है। वहीं भाजपा के विधायकों की संख्या बढक़र 27 हो गई है। प्रदेश विधानसभा  का मौजूदा स्वरूप 65 सदस्य का है।

अहम बात यह है कि उप चुनाव में लोगों ने दलबदल के खिलाफ अपना जनमत दिया है। कांग्रेस के 6 विधायक राज्यसभा के चुनाव  के दौरान बागी हो गए थे। बाद में  विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने  बजट सत्र के दौरान बजट पास होने के मौके पर  व्हीप का उल्लंघन  करने पर इन 6  विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी।  से सभी 6  विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। हिमाचल की राजनीति में बार ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम देखा गए । लिहाजा उप चुनाव में इन इन 6 बागियों को लोगों के आक्रोष का सामना करना पड़ा था। वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा चुनाव में खुद मोर्चा संभाला था। इसमें सुक्खू काफी हद तक  कामयाब भी हुए। कांगे्रस ने उप चुनाव मे  6 में से 4 सीटों अपना परचम लहराया। ऐसे में कांग्रेस का पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है।  उप चुनाव मेंं सुजानपुर से कांग्रेस के कैप्टन रंजीत  सिंह राणा, गगरेट से राकेश कालिया , कुटलैहड़ से विवेक शर्मा और लाहौल स्पीति से अनुराधा ने जीत दर्ज की है। जबकि धर्मशाला से भाजपा के सुधीर शर्मा और बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल चुनाव जीते है।

भले ही हिमाचल में लोकसभा सीटों पर भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा हो पर विधानसभा  के उप चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे साफ होता है कि प्रदेश जनता ने उप चुनाव में दलबदल की राजनीति को पूरी तरह से नकार दिया।  मुख्यमंत्री  ने उप चुनाव में धंआधार प्रचार किया था। मुख्यमंत्री के साथ साथ मंत्री व विधायकों की फौज भी चुनाव प्रचार में उतारी गई। वहीं दूसरी ओर उप चुनाव में भाजपा का कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर गया था। यहां तक भाजपा के बई बड़े नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस के बागियों को पार्टी में शामिल करने पर काफी नाराज बताए जा रहे थे। इस बात से भाजपा के प्रदेश के नेताओं ने पार्टी आलाकमान को अवगत करवा दिया था। उप चुनाव में भाजपा जनता की नाराजगी को भांप नहीं पाई। लिहाजा नतीजा यह निकला कि भाजपा उप चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ  आक्रमक प्रचार नहीं कर पाई। बहरहाल उप चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में रहने का भी फायदा मिला है।

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