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शिमला। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), शिमला ने हाल ही में स्थानीय महिला किसानों और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए ओएस्टर मशरूम की खेती पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 50 उत्साही प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना और समुदाय के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना था।
प्रतिभागियों को मशरूम की खेती के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया, जिसमें सब्सट्रेट तैयारी, स्पॉन उत्पादन, और कटाई के बाद की तकनीकें शामिल थीं। विशेषज्ञों ने ओएस्टर मशरूम के पोषण और आर्थिक लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की, साथ ही छोटे पैमाने पर मशरूम उद्यम शुरू करने के बारे में मार्गदर्शन भी दिया।

डॉ. उषा शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र शिमला की प्रभारी, ने अतिरिक्त आय और पोषण सुरक्षा के लिए मशरूम की खेती के महत्व पर जोर दिया, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को मशरूम की खेती की कम लागत और कम जगह में होने वाले व्यवसाय के बारे में समझ बढ़ाना था, जो इसे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने का एक अतिरिक्त व्यवसाय बन सकता है। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी की सराहना की और अपने लिए अतिरिक्त व्यवसाय का एक आदर्श विकल्प बताया इसको अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।


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