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शिमला। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) शिमला ने स्थानीय महिला किसानों और युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 60 महिला किसानों और युवाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें बताया गया कि यह एक स्थायी आजीविका का अच्छा विकल्प हो सकता है। उन्हें सिखाया गया कि मधुमक्खी पालन से रोजगार के नए अवसर कैसे मिल सकते हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रोहड़ू के जाने-माने मधुमक्खी पालक श्री सूरज चौहान ने सबको मधुमक्खी पालन के गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों की देखभाल कैसे करें, उनके छत्ते कैसे संभालें, शहद कैसे निकालें और इससे संबंधित अन्य पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी।
केवीके शिमला की वैज्ञानिक डॉ. शिखा भागटा ने मधुमक्खी पालन की उद्यमशीलता क्षमता पर जोर दिया। डॉ. भागटा ने बताया कि शहद उत्पादन के अलावा मधुमक्खी पालन, परागण और विभिन्न मधुमक्खी उत्पादों में भी अवसर प्रदान करता है।
केंद्र की प्रमुख डॉ. उषा शर्मा ने मधुमक्खियों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियां परागण के माध्यम से जैव विविधता बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि मधुमक्खी पालन ग्रामीण विकास और स्थायी आजीविका में योगदान देता है।

इस कार्यक्रम में लोगों को मधुमक्खी पालन के संबंध में लगभग सभी पहलुओं के बारे में बताया गया और साथ ही उन्हें प्रैक्टिकल करके भी सिखाया गया। जिन लोगों ने इसमें भाग लिया, वे अब खुद मधुमक्खी पालन में सक्षम हैं। केवीके शिमला की यह पहल क्षेत्र में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और नए आर्थिक अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी की सराहना की और कहा कि इस प्रशिक्षण ने कृषि के क्षेत्र में उनके लिए आर्थिक संभावनाओं की एक नई दिशा दिखाई है।


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