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शिमला। कृषि विज्ञान केंद्र शिमला ने डोडरा में एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों में सत्त और प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम में 40 से अधिक किसानों ने भाग लिया और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए जानकारी प्रदान की गई।
शिविर में सत्त और प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने और अन्य विषयों को शामिल किया गया। शिविर में मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशें, औषधीय पौधों का महत्व और सेब के बागीचों में रोग प्रबंधन के बारे में बताया गया। इस जागरूकता शिविर में डा. नागेंदर बुटेल, डा. अजय ब्राक्टा और डा् शिखा भागटा ने किसानों को जानकारी दी।
डा. नागेंदर बुटेल, मृदा वैज्ञानिक ने मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने और सही मात्रा और प्रकार निर्धारित करने के बारे में बताया, जो फसलों के विकास के लिए जरूरी है। किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरकों के उपयोग के महत्व के बारे में बताया गया ताकि वे अधिक उर्वरक उपयोग को रोक सकें।
इस अवसर पर डा. शिखा भागटा ने औषधीय पौधों की खेती और महत्व के बारे में इसके अलावा, इस कार्यक्रम में डा. अजय ब्राक्टा ने सेब के बागीचों में रोग प्रबंधन के अहम मुद्दे के बारे में किसानों को जानकारी उपलब्ध करवाई। इस शिविर में विशेषज्ञों ने सेब के पेड़ों को प्रभावित करने वाले रोगों की पहचान, रोकथाम और प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीकों पर जानकारी प्रदान की।
विशेषज्ञों ने डोडरा में किसानों को दी प्राकृतिक खेती की जानकारी
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