Sunday, January 11, 2026

वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी का 13वां दीक्षांत समारोह आयोजित

राज्यपाल ने मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा
हिमाचल आजकल
शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज सोलन जिला के नौणी स्थित ड$ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
इस अवसर पर राज्यपाल ने मेधावी विद्यार्थियों को 12 स्वर्ण पदक प्रदान किए, जिनमें से आठ स्वर्ण पदक,  छात्राओं  को प्रदान किए गए। उन्होंने विद्यार्थियों को बागवानी एवं वानिकी में 119 पीएचडी की उपाधियां भी प्रदान कीं।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने एमएससी और बीएससी के विद्यार्थियों को भी उपाधियां प्रदान कीं। दीक्षांत समारोह में कुल 816 उपाधियां प्रदान की गईं। उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह उनके जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि आज के दिन उन्हें वर्षों की मेहनत का फल मिला है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि अधिकतर स्वर्ण पदक विजेता छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि आज बेटियां उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि कृषि, बागवानी और वानिकी में महिलाआें की भूमिका बहुत अहम है। बेटियों का बढ़ता वर्चस्व बेहतर भारत के निर्माण के ²ष्टिगत दूरगामी भूमिका निभाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अनुपात और भी बेहतर होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की बधाई दी और हिमाचल प्रदेश के निर्माता और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार के योगदान को याद किया।
शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 49 प्रतिशत क्षेत्र में सेब का उत्पादन किया जाता है और कुल फल उत्पादन में इसका 84 प्रतिशत योगदान है। राज्य में सेब की अर्थव्यवस्था 5000 करोड़ रुपए से अधिक है। उन्होंने कहा कि मौसम में परिवर्तन और रासायनिक कीटनाशकों के अधिक प्रयोग ने फल उत्पादन से लेकर गुणवत्ता तक सारी श्रृंखला को प्रभावित किया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय ने प्रातिक खेती प्रणाली अपनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए 2 हजार 481 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय प्रातिक खेती मिशन को मंजूरी दी है, जिसका प्रदेश को भी लाभ उठाना चाहिए।


राज्यपाल ने भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत फ्रेमवर्क रैंकिंग में देश के षि विश्वविद्यालयों में 18वां स्थान प्राप्त करने तथा विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना केन्द्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना क राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह तथा स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश षि-बागवानी प्रधान राज्य है, जिसने उच्च तकनीक अपनाकर किसानों और बागवानों की आजीविका और आय के साधन बढ़ाने में सफलता प्राप्त की
उन्होंने कहा कि अब मंडियों में सेब की खरीद प्रति किलोग्राम के हिसाब से की जा रही है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के तहत सेब उत्पादकों की सभी देनदारियों के निपटान के लिए 153 करोड़ रुपए जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि सेब के समर्थन मूल्य में 1$50 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिससे सेब के समर्थन मूल्य में 12 रुपए प्रति किलो हुआ है।
बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्घता के अनुरूप बागवानी नीति को लागू करने वाला हिमाचल प्रदेश पहला राज्य होगा, जिससे 82,500 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रातिक खेती में अनुसंधान एवं विकास के लिए विश्वविद्यालय को लगभग 4 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रातिक खेती से उत्पादित मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है।


उन्होंने कहा कि 1,292 करोड़ रुपए की एचपी-शिवा परियोजना के तहत वर्ष 2028 तक बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सिरमौर, सोलन और ऊना के 28 विकास खंडों में 6000 हेक्टेयर क्षेत्र को बागवानी के अंतर्गत लाने का लक्ष्य है, जिससे 15 हजार से अधिक बागवान परिवार लाभान्वित होंगे।

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