हिमाचल आजकल
शिमला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व जुब्बल-नावर-कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के बजट से हर वर्ग विशेषकर कर्मचारी, रोजगार सृजन, पर्यटन उद्योग, किसान और मजदूर और आम आदमी को केवल घोर निराशा ही हाथ लगीं हैं। बजट को देखकर लगता हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार बजट में हिमाचल प्रदेश का नाम डालना ही भूल गई हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण समाज में असमानता बढ़ती जा रही हैं। डबल इंजन की भाजपा सरकार में पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं की फौज बढ़ती जा रहीं हैं। देश में बेरोजगारी दर पिछले 45 साल के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि हाल ही में जारी एक आंकड़े के अनुसार हिमाचल प्रदेश में हर तीसरा ग्रेजुएट युवा बेरोजगार हैं । देश में पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं की संख्या का आंकड़ा 3$ 03 करोड़ से भी पार हो गया हैं, यह संख्या 2020 के देशभर में लगे लॉकडाउन के दौर से भी ज्यादा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली मनरेगा योजना के बजट में भी कटौती की गई। उनका कहना है कि एक ओर जहां केंद्र की भाजपा सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत कर वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती रही वहीं दूसरी ओर सरकार ने खाद, कीटनाशक-फफूंदनाशक दवाईयों पर मिलने वाली अनुदान राशि में हर वर्ष कटौती की जा रही हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सेब पर आयात शुल्क में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की बात कही थी जिस पर इस बजट में भी बागवानों को घोर निराशा मिली हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में लाखों लोगों की आजीविका से जुड़े पर्यटन उद्योग को तरजीह नही दी गई। केंद्रीय बजट ने लघु व सूक्ष्म उद्योगों को भी निराश किया हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य जैसे अतिमहत्वपूर्ण क्षेत्र को कुल बजट का 2.5 फीसदी बजट मिलना चाहिए था लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले कई वर्षो से 1.3 फीसदी ही रखा जो कि बेहद कम हैं। एनडीए सरकार ने प्रदेश में रेलवे लाइन विस्तार और 69 नैशनल हाइवें बनाने की पहले भी घोषणा की थी जो कि आज तक कागजो और सर्वेक्षणों तक ही सीमित हैं।


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