प्रदेश में 99. 3 प्रतिशत पंचायतों में की जा रही प्राकृतिक पद्घति से खेती
हिमाचल आजकल
शिमल। हिमाचला में पिछले कुछ वर्षों में किसान व बागवान प्राकृतिक खेती पद्धति की ओर अधिकाधिक संख्या में आकर्षित हुए हैं और उन्होंने रसायन मुक्त खेती को अपनाया है। वर्तमान में प्रदेश में 99. 3 प्रतिशत पंचायतों में प्रातिक पद्घति से खेती की जा रही है और 2 लाख 23 हजार किसानों और बागवानों ने प्रातिक खेती को आंशिक रूप से अपनाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने औी किसानों और बागवानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वकांक्षी निर्णयों की भूमिका श्रेयस्कर हैं। इसी के परिणामस्वरूप प्रदेश में भारी संख्या में किसान व बागवान, रसायन मुक्त खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
सरकार द्वारा गत अढाई वर्षों में किसान हित में जो निर्णय लिए गए हैं वह अप्रत्याशित और ऐतिहासिक हैं। प्रदेश में पहली बार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए वर्तमान सरकार द्वारा इस पद्घति से उगाई विभिन्न फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया। प्राकृतिक खेती से उगाई मक्की पर गत वर्ष 30 रुपए प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया था। इस निर्णय से किसानों में जो खुशी की लहर देखने को मिली और रसायन मुक्त खेती की आेर जिस गति से रूझान बढ़ता दिखा उसके लिए प्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष से समर्थन मूल्य को 30 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिकिलो किया। राज्य सरकार द्वारा अब तक 1509 किसानों से लगभग 400 मीट्रिक टन मक्की की खरीद समर्थन मूल्य पर की गई है। इसी प्रकार गेहूं पर भी 60 रुपए प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है और इसकी खरीद प्रक्रिया भी जारी है।

राज्य सरकार ने प्रदेश के 9$61 लाख किसानों को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती विधि से जोडऩे का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्राकृतिक खेती से उगाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए 10 मंडियों में स्थान निर्धारित कर आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में प्रदेश में कार्यान्वित प्रातिक खेती खुशहाल योजना के तहत 27$60 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं तथा इस वित्त वर्ष के लिए 7.28 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया है।


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