Friday, February 27, 2026

पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल का पूरा जीवन हिमाचल के नवनिर्माण व जनसेवा के लिए समर्पित रहा : रोहित ठाकुर

पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल को 23वीं पुण्यतिथि पर श्रद्घांजलि अर्पित
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल के तीन बार मुख्यमंत्री रहे स्व. ठाकुर रामलाल को उनकी 23वीं पुण्यतिथि पर उन्हें पूरे सम्मान, श्रद्घा और तज्ञता के साथ याद किया गया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जुब्बल नावर कोटखाई द्वारा जुब्बल में आयोजित श्रद्घांजलि समारोह में उनके कर्मभूमि के लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्घांजलि दी। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री और उनके पौत्र, रोहित ठाकुर ने कहा कि स्व. ठाकुर रामलाल केवल एक नेता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी विचारधारा थे, जिनका जीवन हिमाचल के नवनिर्माण और जनसेवा के लिए समर्पित रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल गौरव व आत्म सम्मान के प्रतीक हैं। ठाकुर रामलाल का हिमाचल निर्माता डा.यशवंत सिंह परमार के साथ हिमाचल के विकास में अहम योगदान रहा हैं।


एक दूरदर्शी और आम परिवार से निकले नेता

रोहित ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. ठाकुर रामलाल एक सामान्य किसान परिवार से थे जिन्होंने संघर्ष कर शून्य से शिखर तक का सफर तय किया और हिमाचल को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वो अपने राजनीतिक जीवन मे अजय नेता रहे, जिन्हें 9 बार जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक रहने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने जीवनकाल में विकास और जनता की सेवा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई।



सडक़ों को जीवन रेखा माना

पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सेब बागवानी और ढांचागत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए स्व. ठाकुर रामलाल ने सडक़ों के निर्माण को प्राथमिकता दी। ठाकुर रामलाल सडक़ों को जीवन रेखा कहा करते थे। एक समय में जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में सबसे अधिक जीवन सडक़ों का जाल बिछा था।


स्व. ठाकुर रामलाल ने विश्वविद्यालयों की स्थापना

शिक्षा मंत्री ने कहा कि ठाकुर रामलाल एक उच्च कोटि के शिक्षाविद और प्रभावशाली नेता थे। जब हिमाचल में उच्च शिक्षण संस्थानों का सपना भी बहुत दूर था तब उन्होंने इसे साकार करने में अहम भूमिका निभाई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, सोलन का डा$ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, और पालमपुर का कृषि विश्वविद्यललय उनके प्रयासों का परिणाम हैं, जिन्होंने प्रदेश के युवाआें को ज्ञान के अनेक द्वार खोले। इसके साथ ही 1971 में हिमाचल को अपना पृथक उच्च न्यायालय मिलना भी उनके प्रयासों का ही परिणाम था।



सेब बागवानी में अहम योगदान
पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को बागवानी के लिए प्रेरित कर उन्होंने सेब जैसी नकदी फसल को आय का मुख्य स्रोत बनाया। मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब के समर्थन मूल्य की शुरुआत, कोल्ड स्टोर की स्थापना, एचपीएमसी को मजबूत बनाने में उनका अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि प्रगतिनगर में गत्ते की फैक्टरी खोलने का प्रस्ताव भी पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल के द्वारा रखा गया था। उनके कार्यकाल में सेब को एचपीएमसी के द्वारा विदेशों में निर्यात किया गया जो अपने आप मे एक बड़ी उपलब्धि रही।

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