Thursday, February 26, 2026

मादक पदार्थों के खिलाफ राष्ट्रीय जन मुहिम में हिमाचल अग्रणी राज्य बनकर उभरा


प्रदेश  में  अढ़ाई वर्ष में पांच हजार से अधिक एनडीपीएस मामले दर्ज, 36.95 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त

हिमाचल आजकल

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व मेें हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ जन मुहिम छेड़ी गई हैै। युवा शक्ति को नशे की बुराई से बचाने और प्रदेश में व्याप्त ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्य सरकार बहुआयामी रणनीति के तहत कार्य कर रही है।
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में सिन्थेटिक ड्रग्स के मामले सामने आएं हैं। फार्मास्युटिकल हब के नज़दीक क्षेत्रोें में इस तरह के मामले अधिक दर्ज किए जा रहे हैं। इस खतरे से निपटने के लिए सरकार तत्परता के साथ कार्य कर रही है। फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए जांच एवं निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण कानून बनाकर अपने कानूनी ढांचे को और मजबूत किया है। हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 और हिमाचल प्रदेश ड्रग्स और नियंत्रित पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक, 2025 के तहत नशे में संलिप्त लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक में मृत्युदंड, आजीवन कारावास, भारी जुर्माना और संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। दूसरे विधेयक में अवैध नशीली दवाओं के व्यापार के लिए सख्त सजा सुनिश्चित की गई है। प्रदेश सरकार ने सिक्किम मॉडल से प्रेरित होकर नशामुक्ति, पुनर्वास, निवारक शिक्षा और आजीविका सहायता के लिए एक राज्य कोष बनाया गया है।
राज्य सरकार नशे के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति अपना रही है। तस्करों पर अंकुश लगाते हुए वर्ष 2024 में पीआईटी-एनडीपीएस के तहत निवारक निरोधक कानून को अमल में लाया गया है। इसके तहत प्रस्तुत 123 प्रस्तावों में से 41 डिटेंशन ऑर्डर जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने नशे की तस्करी में संलिप्त लोगों की जुड़ी 1,214 अवैध संपत्तियों की पहचान की है और अतिक्रमण के 70 मामलों में कार्रवाई की गई है तथा कुछ मामलों में संपत्तियों को जब्त किया गया है। राज्य सरकार ने नशे के कारोबार में संलिप्त 80 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई है।
इसके तहत वर्ष 2023 से 2025 के मध्य तक पुलिस विभाग ने प्रभावशाली तरीके से कार्य किया है। अढ़ाई साल की अवधि में कुल 5,004 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए, जिनमें वर्ष 2023 में 2,147 मामले, 2024 में 1,717 और जून 2025 तक 1,140 मामले शामिल हैं।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश सरकार जन सहभागिता के साथ समाज से नशे का समूल नाश करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य मंे नशे के विरूद्ध कानून की कड़ी अनुपालना, दोषियों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई, विधायी सुधारों, पुनर्वास जैसे मुद्दों को कंेद्र मंें रखकर बहुआयामी रणनीति अपनाकर कार्य किया जा रहा है।
नशे के माध्यम से जोड़ी गई नशा कारोबारियों की संपत्ति को भी कुर्क किया जा रहा है। अढ़ाई वर्ष की अवधि के दौरान 36.95 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसमें वर्ष 2023 में 4.87 करोड़ रुपये, वर्ष 2024 में 25.42 करोड़ रुपये और जून 2025 तक 6.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां शामिल हैं। सरकार के यह कदम प्रदर्शित कर रहे हैं कि हिमाचल में नशे और इससे जुड़े हुए नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फैंका जाएगा। 7.74 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े अतिरिक्त मामलें पुष्टि के लिए भेजे गए हैं।
मार्च 2025 में, धर्मशाला, मंडी और परवाणू के तीन क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के गठन से एक बड़ा संस्थागत विस्तार मिला, यह ऊना, कुल्लू, बद्दी और सिरमौर जैसे क्षेत्रों को कवर करता है। एसटीएफ के तहत तेरह पुलिस स्टेशन लाए गए हैं, जिनमें से छह पहले से ही क्रियाशील हैं जो तस्करों और अपराधियों के खिलाफ त्वरित और सटीक अभियान का संचालन सुनिश्चित कर रहे हैं।
नशे की आदत से ग्रसित लोगों को प्रभावी पुनर्वास प्रदान करने के प्रयास भी प्रगति पर है। जिला कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के लिए नशामुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जबकि कुल्लू में रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा महिलाओं के लिए एक केंद्र का संचालन किया जा रहा है। सिरमौर के कोटला बड़ोग में 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक नशामुक्ति केंद्र बनाया जा रहा है। सभी जिलों में ऐसे केंद्र स्थापित करने की कार्य योजना तैयार की गई है।
नशे के आदी लोगों के प्रदेश सरकार संवेदनशील रवैया अपना रही है। इन लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। नशे के आदी लोगों को बेहतर चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। उनका कौशल संवर्धन कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। वर्तमान में इन लोगों के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आया है। बच्चों को छोटी उमर में ही नशे के दुष्प्रभावों से अवगत करवाने के लिए  स्कूली पाठ्यक्रम में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता पर एक अध्याय भी शामिल किया गया है।

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