Sunday, April 12, 2026

डॉ. यशवंत सिंह परमार को ‘भारत रत्न’ हिमाचल के गौरव का सम्मान : रोहित ठाकुर

हिमाचल आजकल

शिमला। हिमाचल प्रदेश के निर्माता और पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से दिया जाना चाहिए, यह हिमाचल प्रदेश के 75 लाख प्रदेशवासियों की भावना का सम्मान होगा। यह बात शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को भारत रत्न देने के प्रस्ताव में चर्चा के दौरान कही। रोहित ठाकुर ने विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस ऐतिहासिक मांग पर विचार करने का आग्रह किया। शिक्षा मंत्री ने डॉ. परमार को हिमाचल प्रदेश के गौरव, स्वाभिमान और पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. परमार ने एक ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश के निर्माण का सपना देखा, जब यह क्षेत्र आर्थिक रूप से बेहद पिछड़ा और दुर्गम था। 1960 के दशक में कांगड़ा जैसे मैदानी क्षेत्रों के विलय से पहले हिमाचल चंबा से लेकर सिरमौर तक केवल पहाड़ी क्षेत्रों का समूह था। उनकी दूरदर्शिता थी कि उन्होंने राज्य पुनर्गठन समिति (Fazal Ali Commission) के समक्ष मजबूती से हिमाचल को एक अलग राज्य के रूप में स्थापित करने की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि पहाड़ी लोगों की अपनी विशिष्ट संस्कृति, पहचान और परिस्थितियां हैं, जिन्हें बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

विकास की नींव रखने वाले दूरदर्शी मुख्यमंत्री

रोहित ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार ने लगातार 18 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में हिमाचल प्रदेश की सेवा की। उनके नेतृत्व में ही हिमाचल प्रदेश ने विकास की एक लंबी और कठिन यात्रा तय की। जहाँ कभी प्रदेश का वार्षिक बजट मात्र ₹52 करोड़ था वहीं अब ₹58,000 करोड़ से अधिक हो गया है।

डॉ० परमार ने सड़कों को दी प्राथमिकता

रोहित ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार ने राज्य के विकास के लिए सड़कों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उस समय सड़कों की कमी थी लेकिन उन्होंने इन्हें हिमाचल की “जीवन रेखा” और “भाग्य रेखा” की संज्ञा दी। आज का व्यापक सड़क नेटवर्क उन्हीं की दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

हिमाचल में विश्वविद्यालय की स्थापना की

उन्होंने कहा कि डॉ० परमार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1971 में, जब वे मुख्यमंत्री थे और ठाकुर रामलाल शिक्षा मंत्री थे तब हिमाचल को अपना विश्वविद्यालय मिला। उन्होंने उच्च न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की भी स्थापना की।

उच्च पदों पर रहे लेक़िन नही भूले पहाड़ी संस्कृति

रोहित ठाकुर ने आगे कहा कि डॉ० परमार अपनी जड़ों से जुड़े रहे। डॉ. परमार ने कभी अपने मूल को नहीं भुलाया। वे एक उच्च कोटि के संसदीय नेता थे लेकिन उनकी पहचान हमेशा उनकी पहाड़ी संस्कृति और सादगी से रही। उनका पहाड़ी पोशाक (लोहिया) पहनना और स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना इस बात का प्रमाण है कि वे अपनी जड़ों से कितने गहराई से जुड़े थे।

डॉ. यशवंत सिंह परमार का बागवानी के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान

शिक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. परमार की दूरदर्शिता और उनके द्वारा उठाए गए ठोस कदमों के कारण ही हिमाचल प्रदेश आज ‘फ्रूट बाउल ऑफ इंडिया’ (भारत का फलों का कटोरा) बन पाया है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार ने बागवानी के महत्व को बहुत पहले ही समझ लिया था। उन्होंने न केवल इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाईं बल्कि यह सुनिश्चित किया कि ये नीतियां जमीनी स्तर पर लागू हों। उनके प्रयासों से हिमाचल में बागवानी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आया जिसने किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया।
डॉ. परमार ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बागवानी को राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ बनाने का सपना देखा। उनके इस सपने और प्रयासों का ही परिणाम है कि आज हिमाचल प्रदेश सेब, आड़ू, प्लम और अन्य फलों के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर रहा है जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति हो रही है। रोहित ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि उन्होंने ही हिमाचल को बागवानी के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अंत में कहा कि डॉ. परमार का योगदान इस प्रदेश को वर्तमान स्वरूप में लाने के लिए अतुलनीय है और उनका स्थान कोई और नहीं ले सकता। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना न केवल उनके प्रति सम्मान होगा, बल्कि भावी पीढ़ियों को भी उनसे प्रेरणा मिलेगी।

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