Sunday, January 11, 2026

यूनेस्को के विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क का हिस्सा बनी स्पीति घाटी

स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र 7770 वर्ग किलोमीटर
हिमाचल आजकल
शिमला। लाहौल स्पीति जिले की स्पीति घाटी को यूनेस्को के प्रतिष्ठित मानव और बायोस्फीयर (एमएबी) कार्यक्रम के तहत देश के पहले शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता औपचारिक रूप से 26 से 28 सितंबर तक चीन के हांगझोउ में आयोजित 37वीं अंतरराष्ट्रीय समन्वय परिषद (एमएबी-आईसीसी) की बैठक के दौरान प्रदान की गई। इस समावेशन के साथए भारत के अब एमएबी नेटवर्क में कुल 13 बायोस्फीयर रिजर्व हो गए हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार के दक्ष व व्यावहारिक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने इस क्षेत्र की अनूठी पारिस्थितिकी, जलवायुए संस्कृति और विरासत के साथ साथ उन स्थानीय समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता पर लगातार जोर दिया है, जो पीढिय़ों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रह रहे हैं। वन विभाग और वन्यजीव विंग को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा सरकार विकासात्मक गतिविधियों और प्रकृति के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करते हुए, जलवायु परिवर्तन के युग में हिमाचल प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत और नाजुक पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिजर्व 7770 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र में फैला है। जिसमें पूरी स्पीति वन्यजीव प्रभाग 7591 वर्ग किलोमीटर और लाहौल वन प्रभाग के आसपास के हिस्से शामिल हैं। जिनमें बारालाचा दर्राए भरतपुर और सरचू (179 वर्ग किलोमीटर) शामिल हैं।


3300 से 6600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र, भारतीय हिमालय के ट्रांहिमालय जैव भौगोलिक प्रोविंस के तहत आता है। रिजर्व को तीन क्षेत्रों में संरचित किया गया है। 2665 वर्ग किलोमीटर कोर ज़ोन, 3977 वर्ग किलोमीटर बफर जोन और 1128 वर्ग किलोमीटर ट्रांजिशन जोन। यह पिन वैली राष्ट्रीय उद्यानए किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि और सरचू मैदानों को एकीकृत करता है। यह विषम जलवायुए स्थलाकृति और नाज़ुक मिट्टी द्वारा निर्मित एक अद्वितीय शीत रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से समृद्ध हैए जिसमें 655 जड़ी.बूटियों 41 झाडिय़ों और 17 वृक्षों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें 14 स्थानिक और 47 औषधीय पौधे शामिल हैं।

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