Saturday, August 1, 2026

नई सडक़ों के निर्माण में उत्तम तकनीक व मानकों का प्रयोग किया जाए : रोहित ठाकुर

 शिक्षा मंत्री ने जुब्बल कोटखाई क्षेत्र में विकासात्मक कार्यों की समीक्षा की
हिमाचल आजकल
शिमला। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज विधानसभा क्षेत्र जुब्बल कोटखाई में लोक निर्माण विभाग के विकास कार्यों की प्रगति के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा से क्षतिग्रस्त सडक़ों सहित भविष्य में नई सडक़ों के निर्माण में ऐसी उत्तम तकनीक एवं मानकों का प्रयोग किया जाए जिससे आपदाओं और अन्य विषम परिस्थितियों में भी सडक़ें बहाल बनी रहें।
रोहित ठाकुर ने कहा कि भविष्य के निर्माण को इस तकनीक और डिजाइन से तैयार करना चाहिए। वर्ष 2023 और इस वर्ष भारी बरसात और बादल फटने जैसी परिस्थितियां अगर आगामी वर्षों में दोबारा उत्पन्न होंए तो भी सडक़ें सालभर बहाल रहें और अन्य अधोसंरचना भी क्षतिग्रस्त न हों। इस वर्ष भारी बरसात से लोक निर्माण विभाग के 14 रोहड़ू वृतों में और दो राष्ट्रीय राजमार्गों में कुल 167 करोड़ रुपए की क्षति हुई है। इसमें जुब्बल मंडल में 53 करोड़, कोटखाई मंडल में 50 करोड, रोहड़ू मंडल में 24 करोड़, राष्ट्रीय राजमार्ग 705 में 35 करोड़ और राष्ट्रीय राजमार्ग 707 में पांच करोड़ रुपए का नुकसान शामिल है।


शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस वर्ष आपदा ठीक ऐसे समय पर आई जब सेब सीजन शुरू हो रहा था। आपदा के कारण संपर्क मार्ग कट गए और सेब सीजन पर खतरा मंडराने लगा था। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने तत्परता दिखाई और विपरीत परिस्थितियों में भी संपर्क सुविधा बहाल कर सेब बागवानों को राहत प्रदान की। उन्होंने आपदा के दौरान कर्तव्य निष्ठा और पूरी जिम्मेदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त सभी सडक़ों को छोटे वाहनों के लिए बहाल कर दिया गया है। क्षेत्र में लगभग 14 छोटी बड़ी सडक़ें अभी बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए बंद पड़ी हैं जिन्हें प्राथमिकता प्रदान करते हुए दीपावली तक सुचारु कर दिया जाएगा।
रोहित ठाकुर ने कहा कि जिन स्थानों पर भू-स्खलन लगातार हो रहा है अथवा किसी अन्य कारण से सडक़ निर्माण कार्यों में कठिनाई आ रही हैए ऐसे स्थानों में स्थाई सम्पर्क स्थापित करने के लिए विभाग को बैली पुल के विकल्प पर विचार करना चाहिए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को आपदा पूर्व आकलन (पीडीएनए) के तहत किए जाने वाले  

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