Thursday, February 26, 2026

आरडीजी बंद होने के बावजूद ओपीएस और अन्य कल्याणकारी योजनाएं रहेंगी जारी : सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने कार्यकाल में आरडीजी का दुरुपयोग किया
हिमाचल आजकल
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त करने के बावजूद राज्य सरकार की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। उन्होंन साफ किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जनता के अधिकारों और हितों की हर हाल में रक्षा करेगी।
आज शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में होती, तो ओपीएस को हटाकर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू कर दी जातीए जिससे सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से आने के कारण वे आम लोगों की परेशानियों को भली- भांति समझते हैं और उनकी सरकार कभी भी जनहित से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन भले ही वित्त विभाग देखता होए लेकिन सरकार का मुख्य उद्देश्य संसाधनों को मजबूत करना और विकास को गति देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 से 2021 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और फिजूल खर्ची के कारण आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य को लगभग 54,000 करोड़ रुपए आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपए जीएसटी के रूप में मिलेए लेकिन इनका उपयोग पूंजीगत विकास के बजाय ठेकेदारों को खुश करने में किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 1,000 करोड़ रुपए ऐसी इमारतों पर खर्च किए गए जो आज खाली पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी प्राप्त हुए हैंए फिर भी राज्य सरकार ने सख्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 26,683 करोड़ रुपए अपने संसाधनों से जुटाए हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा से जनता को गुमराह करने के बजाय केंद्र सरकार से राज्य के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के तहत मिलने वाला आरडीजी राज्यों के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के बजट पर गंभीर असर डालेगा। उन्होंने आरडीजी समाप्त किए जाने को प्रदेश के प्रति केंद्र सरकार का सौतेला व्यवहार बताया और कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल प्रदेश एक राजस्व घाटा राज्य बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वे आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे और राज्य के हक के लिए हर मंच पर लड़ाई लड़ेंगे।

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