Wednesday, February 25, 2026

भाजपा बताए, प्रदेश को आरडीजी मिलने के पक्ष में हैं या नहींः मुख्यमंत्री


उद्योग मंत्री बोले, सर्वदलीय बैठक में गुटों में बंटी दिखी भाजपा, बिंदल अकेले ही कर गए वॉकआउट

हिमाचल आजकल

शिमला। सिरमौर जिला के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के सराहां में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दूध पर समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है और अदरक पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया जाएगा। एक वर्ष के भीतर सराहां अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की जाएगी साथ ही अल्ट्रासाउंड मशीन भी स्थापित होगी। उन्होंने सराहां में सीबीएसई स्कूल खोलने और सराहां-चंडीगढ़ सड़क मार्ग को डबललेन करने की भी घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस नेता दयाल प्यारी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।
प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाई एस परमार को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए धारा 118 का प्रावधान किया और वर्तमान राज्य सरकार भी उन्हीं के पद चिन्हों पर चल रही है। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार के समय से प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा, लेकिन 16वें वित्तायोग ने 77 साल पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया।
राजस्व घाटा अनुदान सरकार का नहीं, प्रदेश के लोगों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के लोगों के हितों की लड़ाई लड़ रही है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा नेताओं की मांग पर सर्वदलीय बैठक का स्थान बदला गया लेकिन हिमाचल के हितों के लिए भाजपा खड़ी नहीं हुई, जबकि अन्य सभी दलों ने राजस्व घाटा अनुदान पर राज्य सरकार को समर्थन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में जब उन्होंने भाजपा नेताओं से पूछा कि क्या वह हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान मिलने के पक्ष में हैं, तो उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को प्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपए की कटौती का मुद्दा प्रदेश की जनता के समक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग कोई खैरात नहीं मांग रहे, यह हिमाचल प्रदेश का हक है। राज्य सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेगी और इसमें लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के पास जाकर राजस्व घाटा अनुदान बहाल कराएं।
श्री सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 70 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि मिली लेकिन उन्होंने इसका सदुपयोग नहीं किया। अगर पूर्व भाजपा सरकार ने इस पैसे का सदुपयोग किया होता तो प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपए का कर्ज और 10 हजार करोड़ रुपए की देनदारियां नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने एक हजार करोड़ के भवन सिर्फ मित्रों को खुश करने के लिए बना दिए, जबकि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिन रात प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा ‘‘कुछ भी हो, मैं चुनौतियों का मुकाबला करने और जीतने की क्षमता रखता हूं।’’ आपदा प्रभावितों की मदद के लिए राज्य सरकार ने कानून बदल दिया और पूरी तरह से घर क्षतिग्रस्त होने पर मिलने वाली डेढ़ लाख रुपए की आर्थिक सहायता को आठ लाख रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवा सेना में जाकर देश सेवा करते हैं लेकिन अग्निवीर योजना लागू कर हिमाचल के युवाओं के साथ धोखा किया गया है। यही नहीं केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम ही नहीं बदला बल्कि इस योजना की आत्मा को ही मार दिया, जो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सोच का परिणाम थी।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने सबसे पहली योजना उन बच्चों के लिए बनाई, जिनका पालन-पोषण करने वाला कोई नहीं था। उन्हें सिर्फ सहानुभूति मिलती थी लेकिन राज्य सरकार ने कानून बनाकर 6,000 अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया, जहां 27 वर्ष की आयु पूरा होने तक सरकार ही उनकी माता व पिता होगी।
अब राज्य सरकार ने विधवा महिलाओं के बच्चों को भी प्रदेश से बाहर शिक्षा हासिल करने के लिए आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा “गरीब और युवाओं का दर्द महसूस करना ही व्यवस्था परिवर्तन है।” उन्होंने कहा कि बद्दी-नालागढ़ में पूर्व भाजपा सरकार ने 5,000 हजार करोड़ रुपए की जमीन कौड़ियों के भाव दे दी। इसके अलावा चुनाव से पहले पूर्व भाजपा सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपए की रेवड़ियां सिर्फ चुनाव जीतने के लिए बांट दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीएस को बंद करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार झुकेगी नहीं।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और गत तीन वर्ष संघर्षपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजनीतिक आपदा, आर्थिक आपदा और प्राकृतिक आपदा का सामना किया है। राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायकों ने ऑपरेशन लोटस के जरिए सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया लेकिन जनता ने 2027 तक सरकार चलाने का फिर से आशीर्वाद कांग्रेस पार्टी को दिया।
उन्होंने कहा कि आज आर्थिक रूप से हिमाचल प्रदेश का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 1952 से मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई लेकिन भाजपा ने उस बैठक से भी वॉकआउट किया। विधानसभा से वॉकआउट तो सुना था, लेकिन सर्वदलीय बैठक से पहली बार वॉकआउट हुआ है। उन्होंने कहा कि बैठक में साफ तौर पर दिखा कि भाजपा किस प्रकार से गुटों में बंटी हुई है।
सर्वदलीय बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल पहले अकेले वॉकआउट कर गए जबकि पांच विधायक बैठक में बैठे रहे। काफी देर तक दुविधा में रहने के बाद नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के अन्य विधायक बाहर निकले। उन्होंने कहा कि जब भी प्रदेश हित की बात हो तो राजनीति दलों को विचारधारा से ऊपर उठ कर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हिमाचल प्रदेश की जनता और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता चट्टान की तरह खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यह भी व्यवस्था परिवर्तन का हिस्सा है जब विपक्ष के विधायक को मंच से बोलने का अवसर मिल रहा है। जबकि भाजपा सरकार के समय तो बैठने के लिए भी जगह नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आम जनता के दर्द को समझते हैं, इसलिए वह विपक्ष के विधायकों वाले विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर वहां विकास की गति को बढ़ा रहे हैं, जबकि जब कांग्रेस विपक्ष में थी तो कांग्रेस विधायकों वाले विस क्षेत्रो में विकास की गति को धीमा कर दिया जाता था।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को मुख्यमंत्री के रूप में सशक्त नेता मिला है और वह केंद्र के साथ भी अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने छैला-ओछघाट सड़क के लिए 200 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।


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