Saturday, August 1, 2026

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में शोध करने का किया आह्वान


विश्वविद्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए

हिमाचल आजकल

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए।
उन्होंने 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन का उद्घाटन किया। इस भवन में तीन शैक्षणिक मंजिलें, कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब तथा पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित सीबीटी लैब का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा शिक्षण क्षमता बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास भी किया। यह पांच मंजिला भवन होगा, जिसमें पार्किंग, नई कक्षाएं और बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को सशक्त बनाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है तथा इसके विकास के लिए प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, डिजिटल बदलाव और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और विगत वर्षों में यहां काफी सकारात्मक बदलाव आए है। उन्होंने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान की आवश्यकता पर बल दिया।


श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इसी दिशा में सोलन जिले के नालागढ़ में हिमाचल प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय से ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध करने का आग्रह करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में राज्य के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, देश को लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से हिमाचल इस चुनौती का दृढ़ता से सामना करेगा और अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यहित में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार, हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब के माध्यम से शिमला जिले के युवाओं को विभिन्न परीक्षाओं के कंप्यूटर आधारित टेस्ट हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ही देने की सुविधा मिलेगी। इससे पहले उन्हें ऐसी परीक्षाओं के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इस सीबीटी लैब में लगभग 250 युवा एक साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

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