प्रदेश में टमाटर की खेती को दिया जा रहा बढ़ावा :वीरेंद्र कंवर
हिमाचल आजकल
शिमला। प्रकृतिक गलास हाऊस हिमाचल में बेमौसमी टमाटर की खेती ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों में तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। राज्य की जैविक विविधता और कृषि के अनुकूल वातावरण की वजह से पहाड़ी राज्य के किसान गैर मौसमी टमाटर को खेती को बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। प्रदेश में 22753 किसान टमाटर के उत्पादन से जुड़े हैं तथा इनमें से 90 प्रतिशत किसान लघु तथा सीमांत श्रेणी में आते हैं। हिमाचल प्रदेश में गैर मौसमी टमाटर की पैदावार मानसून के दौरान होती है, जब मार्किट में मैदानी इलाकों से टमाटर की आपूर्ति खत्म हो जाती है। जिसकी वजह से किसानों को उपज के लाभकारी मूल्य मिलते हैं। राज्य में गैर मौसमी टमाटर के उत्पादन से स्थानीय उपभोक्ताआें की मांग पूरी होने के साथ पड़ौसी राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की मण्डियों में भी टमाटर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। राज्य के कृषि मंत्री वीरेंन्द्र कंवर ने बताया कि इस समय प्रदेश में 3,20,700 मीट्रिक टन गैर मौसमी टमाटर का उत्पादन किया जाता है और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अगले वर्षों में 4,98,000 मीट्रिक टन गैर मौसमी टमाटर के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
उनका कहना है कि सोलन जिला में कुल उत्पादन का सर्वाधिक 46 प्रतिशत उत्पादन रिकार्ड किया गया है और जिले में उपजे टमाटर का 90 प्रतिशत हिस्सा पड़ौसी राज्यों की मण्डियों में सप्लाई किया जाता है। सिरमौर जिला में 30 प्रतिशत, कुल्लू जिला में 10 प्रतिशत तथा शिमला मण्डी, विलासपुर आदि जिलों में बाकी 14 प्रतिशत फसल का उत्पादन किया जाता है। उन्होंने कहा कि गैर मौसमी टमाटर उत्पादन करने वाले ज्यादातर किसान स्थानीय षि उत्पाद विपणन समिति में अपनी फसल बचने को प्राथमिकता देते हैं। जबकि छ किसान ट्रांसपोर्टस के माध्यम से अन्य राज्यों की सब्जी मण्डियों में अपनी फसल बेचते हैं। सलोगड़ा और नजदीकी क्षेत्रों के कुछ किसानों ने टाटा समूह के देश के सबसे बड़े अनलाइन फूड स्टोर ष्बिग बॉस्केट कंपनी से अनुबंध किया है जबकि कुछ किसान ई-मार्किटप्लेस के माध्यम से अपनी फसल बेचते हैं।


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