एचपीएमसी ने सरकार से नगद भुगतान के लिए मांगे 45 करोड़
हिमाचल आजकल
शिमला। सरकारी उपक्रम एचपीएमसी इस बार बागवानों को नकद राशि नहीं दे पाएगा। एचपीएमसी ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीदे गए सेब की एवज में सरकार से 45 करोड़ रुपए जारी करने की मांग की है। एचपीएमसी ने कुछ खादों पर अपना मार्जन कम कर दिया है। एचपीएमसी एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब के राशि बदले बागवानों को कम कीमतों पर फंफूदनाशक व कीटनाशक दवाइयां उपलब्ध करवाएगा।
मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीद गए सेब की नकद राशि के लिए बागवानों को अभी इंतजार करना पड़ेगा। सरकार के पास अभी इस राशि को जारी करने के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। लिहाजा बागवानों को एचपीएमसी कम दामों पर खादें व स्प्रे की दवाइयों उपलब्ध कर रहा है। यारा खाद पर एचपीएमसी ने अपना मार्जन केवल पांच फीसदी ही रखा है। एचपीएमसी अब खाद डीलरों के बजाए सीधे कंपनी से ही खाद की सप्लाई के आर्डर दिए है। वहीं फंफूदनाशक व कीटनाशक दवाइयों भी सीधे कंपनियों को सप्लाई आर्डर दिए गए है। इन दवाइयों पर एचपीएमसी ने 15 फीसदी अपना मार्जन रखा है। एचपीएमसी के फील्ड कार्यालयों में अब दवाइयों व खादों की सप्लाई पंहुचनी शुरू हो गई है।
उधर, एचपीएमसी के महाप्रबंधक हितेश आजार का कहना है कि सेब कीस्प्रे की दवाइयों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके अलावा बागवानों को खाद भी उपलब्ध करवाई जा रही है। खाद के दाम खुले बाजार से कम है। उनका कहा है कि मार्च महीने में स्प्रे की कुछ और दवाइयों एचपीएमसी के पास पहुंच जाएगी।
एमआईएस की नकद राशि के लिए बागवानों को करना पड़ेगा इंतजार
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