Sunday, April 12, 2026

हिमाचल विधानसभा में जोरदार हंगामा, विपक्ष ने किया सदन का वॉकआउट


लोहे की चेन और गले में ताले डाल कर विधानसभा परिसर पहुंचे भाजपा विधायक

हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल विधानसभा में एकबार फिर संस्थानों को बंद करने का मामला गूंजा। वीरवार को प्रश्नकल शुरू होते ही विपक्ष दल भाजपा के सदस्य अपनी अपनी सटों पर खड़े होकर संस्थानों को बंद करने के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। काफी देर नारेबाजी करने के बाद भाजपा सदस्यों ने सदन का वॉकआउट कर दिया।
प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को भी विपक्षी दल भाजपा ने सरकार को संंस्थानों को बंद करने के ममाले पर घेरने का प्रयास किया। इससे पहले भाजपा विधायकों ने भाजपा ससरकार के कार्यकाली में खुले सैंकड़ों संस्थानों व अन्य कार्यालयों को बंद करने के मुददे पर विधानसभा परिसर में भी सराकर के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष के विधायकों ने विरोध का अनोखा रास्ता निकाला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने गले में लोहे की चेन और ताले डालकर मुख्यमंत्री के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान सत्ता व विपक्ष विधायकों में तीखी नोकझोंक भी हुई। इससे मुख्मंत्री के चैंबर के बाहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। भाजपा विधायकों के इस विरोध प्रदर्शन से सतापक्ष उखड़ गया और विपक्षी विधायकों के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लाया गया। वीरवार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी विधायक लोहे की चेन व गले में ताले डालकर विधानसभा परिसर में दाखिल हुए।

संस्थानों पर तालाबंदी से लोगों में हाहाकार : जयराम ठाकुर
इस मामले पर सदन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि संस्थानों पर तालाबंदी का प्रदेश सरकार का फैसला सही नहीं है। इस कदम से पूरे प्रदेश में हाहाकार मची है। प्रदेश की जनता में भारी आक्रोश है। विपक्ष का दायित्व बनता है कि वो जनहित के मुददों को बेहतर ढग़ से सदन में रखें। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को बंद करने से पहले कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। सरकार ने बिना सोचे-समझे संस्थानों पर तालाबंदी की।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष आज मुख्यमंत्री से मिलने उनके चैंबर में गया, लेकिन सतापक्ष के विधायकों द्वारा उनके साथ दुव्र्यवहार किया गया। सरकार हमारी आवाज को दबा रही है। ये सामान्य परिस्थति नहीं है और इसके खिलाफ विपक्ष वॉकआउट कर रहा है। इसके बाद विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।


भाजपा सरकार ने जनता के पैसों का दुरूपयोग किया : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा ने अपने कार्यालय के दौरान प्रदेश की जनता का पैसों का दुरूपायेग किया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सदन को गुमराह कर रहे है। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। उनका कहना है कि बजट सत्र के बाद वे सभी विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे। जहां जरूरत होगी वहां संस्थानों को दोबारा खोला जाएगा। प्रदेश सरकार जनता की सेवा करने के लिए आगे बए़ रही है। उन्होंने कहा लोकतंत्र में प्रदर्शन व नारेबाजी होती है। लेकिन आज विपक्षी विधयकों का व्यवहार गैर जिम्मेदाराना था। भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर बिकते रहे।

भाजपा विधायकों का प्रदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण : हर्षवर्धन चौहान
उधर, सतापक्ष ने विपक्ष के इस रवैये की भत्सर्णा की और सदन में निंदा प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष के वाूकआउट के बाद संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने निंदा प्रस्ताव लाते हुए कहा कि सदन के अंदर और बाहर भाजपा विधायकों का प्रदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय है। उनका कहना था कि भाजपा विधानसभा चुनाव में मिली हार से बौखलाहट में है और उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के विधायक केवल प्रदर्शन के लिए विधानसभा आए थे। मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करना सही नहीं है। संस्थानों को बंद करने पर बुधवार को नियम- 67 के तहत चर्चा हो चुकी है। सदन में विपक्ष का व्यवहार सही नहीं है। सतापक्ष की आेर से स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय रत्न ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हुए विपक्ष के व्यवहार की कड़ी आलोचना की।

जयराम ठाकुर अपनी सरकार को नहीं बचा पाए: मुकेश अग्रिहोत्री

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि विधानसभा चुनाव के आखिरी दिनों में अपनी सरकार को बचाने के लिए धड़ा धड़ा संस्थान खोलती रही। लेकिन नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर अपनी सरकार को नहीं बचा पए। बगैर बजट के संस्थान खोलने पर जयराम ठाकुूर को सदन में माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जाता है। अब सरकार बदल गई है। कांग्रेस सरकार अपने विवेक से काम करेगी। उनका कहना है कि विपक्ष की ओर से आज किसी मुद्दों को उठाने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया है। सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी साल में गलत फैसले लिए। बिना बजट के कोरी घोयाणाएं की।

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