Wednesday, February 25, 2026

जलवायु परिर्वतन के प्रभाव को कम करने के लिए जमीनी स्तर कार्य करने की जरूरत: जयराम ठाकुर

हिमाचल आजकल

शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रगति और प्रति के  बीच सामंजस्य बनाकर ही जलवायु परिर्वतन से संबन्धित चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। यह बात मुख्यमंत्री ने शनिवार को  पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित सु²ढ़ हिमालय सुरक्षित भारत, जलवायु परिवर्तन सम्मेलन-2021 की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने  कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरित प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए हमें जमीनी स्तर पर ठोस उपाय करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार सिंचाई सुविधाआें को मजबूत करने, षि उत्पादन बढ़ाने, सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार, आर्थिक सुरक्षा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु परिर्वतन अनुकुलन और दीर्घकालिक सामुदायिक सशक्तिकरण पर ध्यान केन्द्रित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सत्त विकास और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं। वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड के स्तर को कम करने के लिए प्रदेश सरकार हरित ईंधन जैसे जल विद्युत और सौर उर्जा के प्रयोग पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश जल विद्युत संसाधनों में बहुत समृद्घ है और भारत की कुल क्षमता का लगभग 25 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश में है। राज्य की कुल जल विद्युत क्षमता में से अभी तक 10,519 मेगावाट का दोहन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदेश में शीघ्र ही राज्य स्वच्छ ईंधन नीति लाई जाएगी।

जयराम ठाकुर ने कहा कि जलवायु परिर्वतन की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें सार्थक ग्लोबल वार्मिंग कानून का समर्थन करना होगा तथा बिजली संयंत्रों की ऊर्जा दक्षता में सुधार के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा स्रतों का उपयोग भी बढ़ाना होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल जलवायु परिर्वतन सन्दर्भ केन्द्र का शिलान्यास भी किया। भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे$ लीनेयर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व में कई तरह की प्रातिक आपदाएं आ रही हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिक इस मुददे पर गम्भीरता से विचार करेंगे।

स्टूडेंट एजुकेशनल एण्ड कल्चरल मूमेंट ऑफ लद्दाख के अध्यक्ष सोनम वांगचुक ने हिमाचल प्रदेश द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए महत्वाकांक्षी उपायों की सराहना की। उन्होंने जलवायु साक्षरता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आपदाआें को रोकने के लिए समय पर सार्थक कदम उठाए जाने चाहिए। शैक्षणिक शोध संस्थानों में स्थानीय क्षेत्रों से सम्बन्धित चुनौतियों का अध्ययन किया जाना चाहिए।

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