Sunday, January 11, 2026

पहाड़ से हौसले व जन सहयोग के साथ विपदा से उबरने की राह पर कदम बढ़ा रहा हिमाचल

आपदा राहत कोष में अब तक 163 करोड़ से अधिक का अंशदान
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल प्रदेश अब प्राकृतिक आपदा के घाव से उबरने लगा है। इस बरसात के दौरान जलाई और अगस्त माह में बहुत भारी बारिश के कारण प्रदेश भर में तबाही का एक एेसा दौर शुरू हुआ जिसमें 330 से अधिक लोग असमय काल का ग्रास बने हैं। इसके अलावा निजी व सार्वजनिक सम्पत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा से मिले जख्मों को भरने व प्रभावितों की मदद के लिए अनेक लोग व संस्थाएं प्रत्यक्षव परोक्ष रूप से सहयोग कर रही हैं और हजारों की संख्या में सहायता के लिए हाथ बढ़े हैं। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा के दौरान सरहानीय कार्य किया है।
सोमा देवी शिमला शहर के पंथाघाटी में रहने वाली एक वरिष्ठ नागरिक हैं। बीते दिनों वे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से खास तौर पर मिलने पहुंचीं और अपनी एक माह की पेंशन 61 हजार रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए अंशदान के रूप में प्रदान की। इसी तरह अवनि सिंह ने अपने 15वें जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें 51 हजार रुपए राहत कोष के लिए प्रदान किए। यह राशि उन आपदा प्रभावितों को सहारा देने के लिए स्वेच्छा से प्रदान की गई जिन्होंने भारी बारिश, बाढ़ एवं भू-स्खलन के कारण चंद पलों में ही जिंद्गी को बिखरते हुए देखा है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोग हमेशा के लिए अपनों से बिछुड़ गए और सैकड़ों ने अपनी जीवन भर की मेहनत से बनाये आशियाने खो दिए। सोमा देवी, अवनि सिंह जैसे हजारों लोग विपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रदेश सरकार के हमराह व सहयोगी बन रहे हैं ताकि पहाड़ों का वह जज्बा कायम रहे कि संकट को सीने पर सहते भी हैं और इससे उबर कर दोबारा खड़े होने का हौसला भी रखते हैं।


मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष-2023 स्थापित करने का सराहनीय निर्णय लिया और लोगों से इसमें सामर्थ्य अनुसार अंशदान करने की अपील की ताकि केंद्र से सीमित सहायता के बीच एेसी कठिन स्थिति में इस कोष के माध्यम से अधिक से अधिक प्रभावितों को सहायता प्रदान की जा सके। कोष की स्थापना से अब तक समाज के सभी वर्गों की आेर से सहयोग मिला है और 2 सितंबर तक इसमें 163 करोड़ रुपए से अधिक का अंशदान प्राप्त हो चुका है। इस वर्ष बरसात में बादल पिछले 50 वर्षों की तुलना में सर्वाधिक बरसे हैं जिस कारण सडक़ अधोसंरचना, जल आपूर्ति परियोजनाएं, विद्युत लाईनें, भवन, निजी व सार्वजनिक सम्पत्ति बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त हुई है।

Get in Touch

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related Articles