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शिमला। मृदा परीक्षण एक मृदा-प्रबंधन का साधन है जिसका उपयोग मिट्टी की उर्वरता के साथ-साथ फसलों के लिए उर्वरक जरूरतों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। मृदा परीक्षण से बहुमूल्य जानकारी मिलती है, जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है। मिट्टी के पोषक तत्वों की सही मात्रा का पता करके, एक किसान आसानी से मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरक को समायोजित कर सकता है, जिससे उर्वरक के व्यय को कम और अधिक किया जा सकता है और सर्वोत्तम फसल उत्पादन के लिए मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रख सकता है। मृदा परीक्षण के माध्यम से, किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों की सिफारिशें प्राप्त कर सकते हैं जो सही उपज के लिए पौधों की वृद्घि को बढ़ाती हैं। मृदा परीक्षण के महत्व को ध्यान में रखते हुए, रोहड़ू स्थित कृषि विज्ञान केंद्र शिमला के मृदा वैज्ञानिक डा. नागेन्द्र पाल बुटेल ने शिमला जिला के सभी सेब किसानों से आग्रह किया है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अक्टूबर व नवंबर महीने के दौरान अपनी मिट्टी का विश्लेषण करवाएं। किसान अपने बागीचे की मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र शिमला रोहड़ू, क्षेत्रीय बागवानी व प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा और डा. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन से करवा सकते हैं। डा. उषा शर्मा (प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र शिमला) ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र शिमला में किसानों को समय पर और सही मिट्टी परीक्षण परिणाम प्रदान करने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं और उन्होंने किसानों से बड़े पैमाने पर अपनी मिट्टी का परीक्षण करवाने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कृषि विज्ञान केंद्र शिमला 15 अक्टूबर से मिट्टी परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूने लेना शुरू कर देगा।
बागवान अपने बागीचे की मिट्टी की जांच करवाएं : डा. उषा शर्मा
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