Saturday, August 1, 2026

कांग्रेस सत्ता का सेमीफाइनल हार चुकी है अब फाइनल खेलने लायक भी नहीं बची : रणधीर शर्मा

नगर निगम, जिला परिषद और बीडीसी में भाजपा की सुनामी
हिमाचल आजकल
शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकायों के चुनाव परिणामों ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों स्पष्ट कर दी हैं। जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया है और भाजपा के पक्ष में अभूतपूर्व जनादेश देकर यह संकेत दे दिया है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का समय निकट है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार शुरू से इन चुनावों को करवाने से बचती रही। कभी पुनर्गठन का बहाना कभी रोस्टर का बहाना कभी डिलिमिटेशन का बहाना और कभी अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर चुनावों को टालने का प्रयास किया गया। सरकार को पहले से आभास था कि जनता के बीच जाने पर उसे करारी हार का सामना करना पड़ेगा। अंतत: न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद चुनाव करवाने पड़े और परिणाम वही आए जिसका अंदेशा कांग्रेस को पहले से था।

उन्होंने कहा कि चार नगर निगमों में हुए चुनावों में तीन प्रमुख नगर निगमों मंडी धर्मशाला और सोलन में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। नगर परिषदों में 22 में से 12 और नगर पंचायतों में 25 में से 18 स्थानों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि जिला परिषद चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 250 में से 144 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस मात्र 60 सीटों तक सिमट गई। बिलासपुर में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई। मुख्यमंत्री के गृह जिले हमीरपुर में कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर रही। कई जिलों में कांग्रेस एक या दो सीटों तक सीमित होकर रह गई। यह परिणाम कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से और निराशा का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि पंचायत समिति ;बीडीसीद्ध चुनावों में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के 1769 वार्डों में से 1109 वार्डों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की जबकि कांग्रेस 477 तक सिमट गई। प्रधान और उपप्रधान पदों पर भी 65 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधि भाजपा विचारधारा से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों के समय कांग्रेस ने महिलाओं को 1500 प्रतिमाह युवाओं को रोजगार किसानों को समर्थन मूल्य मुफ्त बिजली और अनेक गारंटियां दी थी लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी इनमें से अधिकांश वादे धरातल पर नहीं उतर सके। यही कारण है कि नगर निगम चुनावों में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए बड़े.बड़े वादों और घोषणाओं पर भी जनता ने विश्वास नहीं किया।

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