शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बचाई कांग्रेस की लाज
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल में पंचायती राज चुनाव के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनने लगे है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस व भाजपा को नए सिरे से मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार सत्तासीन है। पंचायतों के चुनाव में सरकार के कई मंत्रियों की राजनीतिक जमीन खिसकती दिख रही है। ऐसे में ये चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी का समय पर गठन न होना बड़ा कारण माना जा रहा है। उधर,जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कांग्रेस की लाज बचा दी। जुब्बल कोटखाई के तीनों जिला परिषद सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया है।
प्रदेश में इस बार पंचायती राज चुनाव ने सभी को चौंका दिया है। जिला परिषद चुनाव सबसे अहम माना जाता है। जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। कांग्रेस कई मंत्रियों के चुनाव क्षेत्र में जिला परिषद की एक भी सीट नहीं जीत पाई है। इससे प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण उभरने लगे है। हालांकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर कांग्रेस व भाजपा अपनी अपनी जीत के दावे कर रही है।
उधर, प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के गठन में एक साल से अधिक का समय लगा गया है। कांग्रेस संगठन का न होने भी कांग्रेस के लिए घातक साबित हुआ है। कांग्रेस की नए कार्यकारिणी के बनाए जाने के ठीक बाद पंचायतों के चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। लिहाजा कांग्रेस संगठन की टीम इन चुनाव में अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा पाया। अहम बात यह है कि अब करीब डेढ़ साल बाद हिमाचल में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में कांग्रेस के मंत्रियों व विधायकों को अब अपनी खोई जमीन को वापस पाने के लिए खूब पसीना बहाना पड़ेगा। वहीं भाजपा के लिए भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पंचायत राज संस्था के चुनाव परिणाम सुखद नहीं रहे है। हालांकि भाजपा को तीन नगर निगम के चुनाव में विजय मिली है। जबकि कई विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को जिला परिषद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
जिला परिषद चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी
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