Tuesday, September 15, 2026

हिमाचल प्रदेश और जापान के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग की नई संभावनाओं के खुलेंगे द्वारः राजेश धर्माणी


इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने जापान की उन्नत शिक्षा, नवाचार एवं अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की

हिमाचल आजकल

शिमला। तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा किया तथा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान तथा विद्यार्थियों के लिए एक्सपोजर कार्यक्रमों की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
जापान के अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण पर गए विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में आयोजित एक सेमिनार में भी भाग लिया तथा जापान की उन्नत शिक्षा व्यवस्था, अनुसंधान, नवाचार और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों की जानकारी हासिल की।
इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री ने नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विस्तारित और विविध सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में मजबूत नवाचार साझेदारी, क्षमता के सर्वोत्तम दोहन और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहायक साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय भ्रमण विद्यार्थियों को नई तकनीक को समझने और अपने ज्ञान व कौशल को संवर्धित करने में सहायक सिद्ध होतेे हैं। यह शैक्षणिक भ्रमण तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य को हासिल करने में मील पत्थर साबित होगा।  
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जापान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ सहयोग की नई संभावनाएं तलाश रहा है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को तेजी से बदलते वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयार करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार से जोड़ना है। यह अनुभव विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक एवं तकनीकी वातावरण को समझने तथा अपने ज्ञान और कौशल को व्यापक बनाने में सहायक साबित होगा।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने होक्काइडो यूनिवर्सिटी, साप्पोरो में एडवांस टेक्नोलॉजिज फॉर सस्टेनेबल फूड हेल्थ एंड मेटिरियलस (आईसीएटीएस-एफएचएम 2026) विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि भी भाग लिया। सम्मेलन में विश्व के विभिन्न देशों से आए प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सत्त विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सत्त कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों को देखते हुए सत्त प्रौद्योगिकी और नवाचार की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। हिमाचल प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, कृषि एवं बागवानी तथा जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ऐसी तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, जो विकास की गति को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रतिभाशाली एवं कुशल युवा व जापान की तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान क्षमता के समन्वय से भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार व्यापक अवसर सृजित होंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, उद्योगों, विद्यार्थियों तथा दोनों देशों की सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

facebooktwitterwebsiteyoutube

Get in Touch

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related Articles