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शिमला। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) शिमला, रोहडू ने आत्मा शिमला के सहयोग से जुब्बल खंड के 125 किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के स्तंभों, अर्थात बीजामृत, जीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) और वापसा, तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में इसकी भूमिका, जिसमें मृदा जैविक कार्बन, सूक्ष्मजीवी गतिविधि और मृदा उर्वरता में सुधार शामिल है, के बारे में जानकारी दी गई। मृदाजनित रोगों जैसे जड़ सड़न और कॉलर रॉट के प्रबंधन में प्राकृतिक खेती की भूमिका के बारे में भी बताया गया, जिसमें मृदा जैविकी में सुधार, जीवामृत और बीजामृत के माध्यम से लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग, उचित जल निकासी एवं आच्छादन बनाए रखने तथा बगीचे में रोग के प्रकोप को कम करने पर विशेष बल दिया गया। वैज्ञानिकों ने विभिन्न अस्त्रों के प्रयोग द्वारा बगीचों और खेतों की फसलों में रोगों एवं कीटों के प्रबंधन हेतु प्राकृतिक खेती आधारित तकनीकों की जानकारी भी साझा की।

इस अवसर पर उपस्थित परियोजना निदेशक, आत्मा शिमला ने किसानों को प्राकृतिक खेती से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी तथा उन्हें लागत कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने और बेहतर आय प्राप्त करने के लिए रसायन मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। किसानों ने संवाद सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने प्रश्न रखे, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।


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