Saturday, October 31, 2026

पुलिस महानिदेशक ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान

हिमाचल आजकल

शिमला। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे से बचाना परिवारों, शिक्षण संस्थानों, पुलिस और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
आज शिमला स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल चेल्सी के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए डीजीपी ने मुख्यमंत्री के नशामुक्त हिमाचल के निर्माण के संदेश को साझा किया। उन्होंने कहा कि ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ केवल नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस का अभियान नहीं है, बल्कि प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के उद्देेश्य से चलाया जा रहा एक जन आंदोलन है।
उन्होंने विद्यार्थियों से इस आंदोलन का संदेश अपने मित्रों और परिवारों तक पहुंचाने तथा इसका सक्रिय दूत बनने का आग्रह किया। साथ ही, अभिभावकों और शिक्षकों से चिट्टे के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम की शुरुआत घर और विद्यालय से होनी चाहिए। इसके लिए जागरूकता, खुलकर संवाद, शुरुआती संकेतों की पहचान और समय रहते उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है।
पुलिस महानिदेशक ने विशेष रूप से अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं, उनकी बातों और चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुनें तथा ऐसा विश्वासपूर्ण वातावरण बनाएं, जिसमें बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने, साथियों के बीच स्वीकार्यता पाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने जैसे दबावों का सामना करते हैं। ऐसे में अभिभावकों की समझ, संवेदनशीलता और भावनात्मक सहयोग का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि घर बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक हैं। हम अपने बच्चों को जो संस्कार, आत्मविश्वास और साहस देंगे, वही भविष्य में उनके फैसलों को दिशा देंगे।
वार्षिक समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ से प्रेरणा लेते हुए पुलिस महानिदेशक ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और दयालुता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों या ऊंचे पदों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि हम किस तरह के इंसान बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सही बात के पक्ष में साहस के साथ खड़े होने, साथियों के नकारात्मक दबाव से बचने और अस्थायी असफलताओं को अपने भविष्य पर हावी न होने देने का आह्वान किया।
अशोक तिवारी ने समारोह में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक कार्यक्रमों, ड्रिल व बैंड प्रदर्शन, कराटे और स्केटिंग की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के समर्पण एवं प्रयासों की प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी।
पुलिस महानिदेशक ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन चिट्टे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल करने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समारोह में उपस्थित प्रत्येक विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक से मुख्यमंत्री के ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ के संदेश को विद्यालय परिसर से बाहर समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने तथा युवाओं की सुरक्षा और नशामुक्त हिमाचल के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
जन संपर्क कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से विद्यालय परिसर में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) के संबंध में जागरूकता शिविर भी लगाया गया। इस दौरान विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपातकालीन हेल्पलाइन, ‘ट्रैक मी’ सुविधा तथा समय पर सहायता प्राप्त करने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश की ईआरएसएस-112 सेवा के प्रदर्शन में हुए उल्लेखनीय सुधार को भी रेखांकित किया गया। आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में प्रदेश ने 34वें स्थान से पहले स्थान तक का सफर तय किया है।

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