हिमाचल आजकल
शिमला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हिमाचल सरकार ने भेड़ों की नस्ल सुधारने के लिए 8.5 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक प्रजनन योजना शुरु की है। राज्य के पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि सरकार ने इस महत्वकांक्षी योजना के अन्तर्गत नस्ल सुधारने के लिए अस्ट्रेलिया से 6 करोड़ रुपये की लागत से 240 मेरिनो भेड़ों (40 नर, 200 मादा) का राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत आयात किया है। इससे देशी प्रजाति की भेड़ों को आयतित अस्ट्रेलिया मैरिनो प्रजाति से क्रॉस ब्रीड करके अगले पांच सालों में 3000. 1 00 टन ऊन का उत्पादन किया जा सकेगा ।
राज्य में वर्ष 2020-21 के दौरान 1482. 244 मीट्रिक टन ऊन उत्पादन रिकार्ड किया गया। चम्बा जिले में सर्वाधिक 425. 012 मीट्रिक टन ऊन उत्पादन रिकर्ड किया गया जबकि कुल्लू और शिमला जिलों में क्रमश: 249.661 मीट्रिक टन एवं 196.474 मीट्रिक टन ऊन का उत्पादन रिकार्ड किया गया।
पशुपालन मंत्री ने बताया कि कच्ची ऊन के परिशोधन के लिए वूलफैड ने वनूरी पालमपुर में अत्याधुनिक संयत्र स्थापित किया है जिसमें वर्ष 2020-21 के दौरान लगभग 11500.000 किलोग्राम ऊन परिष्त की गई। हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान वार्षिक प्रति भेड़ 1599 ग्राम ऊन उत्पादन रिकार्ड किया जा रहा है। राज्य में भेड़ों की दो प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं। उच्च गुणवत्ता की ऊन प्रदान करती है। इनमें से रामपुर बुशैहरी प्रजाति शिमला जिला में पायी जाती है जबकि गद्दी नस्ल की भेड़ें चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल स्पिति में पायी जाती हैं।


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