बागवानों ने क्रेटों में सेब मंडियों में भेजने की मांग उठाई
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल के बागवानों को इस बार मंहगे कार्टन की मार झेलनी पड़ेगी। सेब की पैकिंग की सामग्री के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकार सेब की पैकिंग सामग्री पर 18 फीसदी जीएसटी वसूल रही है। इससे बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। खुले बाजार में सेब की पैकिंग सामग्री के बागवानों से मनमाने दाम वसूले जा रहे है।
हिमाचल के सेब उत्पादों के सामने इस बार एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सेब के पैकिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले कार्टन और ट्रे के कीमतों भारी वृद्वि की गई है। इसका सीधा नुकसान बागवानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। कार्टन के दाम 10 से 15 रूपए बढ़ाए गए है। इसी तरह से ट्रे के दाम में बेहताशा बढ़ोतरी की गई है। वहीं सरकार सेब की पैकिंग सामग्री पर 18 फीसदी जीएसटी वसूल रही है। इससे भी कार्टन के दामों में वृद्वि हुई है। बागवानों को अब अपने उत्पाद को मंडियों तक पहुंचाने का डर सताने लगा है। बागवान अब सरकार से कार्टन व ट्रे की कीमतों के कम करने की गुहर लगाने लगे है।
हिमाचल प्रदेश फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि सरकार सेब की पैकिंग पर लगने वाली जीएसटी को कम करें। जीएसटी कम होने से कार्टन व टे्र के दाम भी कम हो जांएगे। इसका सीधा लाभ बागवानों को होगा। उनका कहना है कि इसे अलावा सरकार सेब की पैकिंग के लिए कै्रट सिस्टम शुरू करें। बागवानों को सस्ते दामों पर क्रैटें उपलब्ध करवाई जाए। मंडियों में सेब किलो के हिसाब से बेचने की व्यवस्था की जानी चाहिए।


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