Sunday, April 12, 2026

हिमाचल में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा देना एक सराहनीय पहल : राज्यपाल

हिमाचल आजकल

शिमला। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय फागली और हिमाचल संस्त अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में वीरवार को  शिमला के एेतिहासिक गेयटी थिएटर में संस्त पर एक नाटक ‘भारत विजयम’ का मंचन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विनोद शर्मा द्वारा निर्देशित कथाकार मथुरा प्रसाद दीक्षित के नाटक का मंचन किया गया।

 इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में संस्त को राज्य की दूसरी राजभाषा का दर्जा देकर प्रदेश सरकार ने बहुत ही सराहनीय पहल की है और अब हम सबको मिलकर संस्त को आगे बढ़ाना है। राज्यपाल ने कहा कि संस्त के प्रयोग और प्रसार के लिए आम लोगों को संभाषण शिविरों में भाग लेने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राजभवन में भी संभाषण शिविर के माध्यम से संस्त का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्त एक बहुत ही समृद्घ भाषा है और इसके शब्द देश के हर राज्य में बोली जाने वाली भाषाआें और बोलियों में पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारत के संसाधनों के साथ-साथ यहां की समृद्घ संस्ति पर भी एक सुनियोजित ढंग से प्रहार किया था और इससे देश की एकता टूट गई। संस्त भाषा पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ा।

भारत में ब्रिटिश शासन से पहले भारत की आर्थिक समृद्घि और साक्षरता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि हम हर तरह से संपन्न और समृद्घ थे। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता के लिए संस्त के उद्भव पर बल दिया।

इससे पहले, निदेशक उच्च शिक्षा  डॉ.  अमरजीत शर्मा ने राज्यपाल को सम्मानित करते हुए कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर शिक्षा विभाग द्वारा अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी मिल सके। उन्होंने संस्त को श्रुति से आगे ले जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संस्त को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं और हाल ही में प्रदेश में दो नए संस्त महाविद्यालयों को अधिसूचित किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शीघ्र ही प्रदेश का अपना संस्त विश्वविद्यालय भी होगा।

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