हिमाचल आजकल
धर्मशाला। ग्रामीण विकास वह पंचायती राज मंत्री मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा है कि प्रदेश के ऊना जिले के अंब में शूगर मिल स्थापित की जाएगी। प्रदेश सरकार ने मिल की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसे लेकर तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। प्रस्तावित शूगर मिल में हर साल 42 हजार टन चीनी का उत्पादन होगा। वे शुक्रवार को सदन में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह की अनुपस्थिति में भाजपा सदस्य रीता कुमारी के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे।
वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इंदौरा के 25 गांवों में गन्ने की पैदावार होती है और करीब 525 हैक्टेयर भूमि पर 3.93 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन यहां पर होता है। उन्होंने कहा कि यह शूगर मिल चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। लिहाजा फिलहाल सरकार का इंदौरा में शूगर मिल लगाने का विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि इंदौरा के किसान मुकेरियां शूगर मिल में गन्ना बेचते हैं। इन्हें वहां पर 25 रुपए प्रति क्विंटल कम कीमत मिल रही है। सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए कमेटी का गठन करेगी। कमेटी पंजाब में किसी भी नजदीकी चीनी मिल में गन्ने की बेहतर कीमत मिलने की संभावनाएं तलाशेगी। उन्होंने कहा कि ऊना में इथ्नोल उद्योग की स्थापना को भी मंजूरी मिली है। यहां भी गन्ने की खपत होगी।
इससे पहले, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधायक रीता धीमान ने इंदौरा में शूगर मिल स्थापित करने का मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि 2002 में हिमाचल और पंजाब के मध्य हुए समझौते के तहत इंदौरा के किसान मुकेरियां शूगर मिल में गन्ना बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों को वहां दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहां मिल मालिक पंजाब के किसानों से 360 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना खरीद रहे हैं, वहीं, हिमाचल के किसानों को प्रति क्विंटल 325 रुपए ही मिल रहा है। साथ ही प्रदेेश के किसानों को गन्ने का भुगतान दो साल बाद किया जा रहा है। उन्होंने किसानों की दिक्कतों के मद्देनजर इंदौरा में शूगर मिल की स्थापना करने व किसानों को प्रति क्विंटल 35 रुपए की दर से होने वाले घाटे की भरपाई के लिए विचार करना चाहिए।


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